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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( रीड्स १०२ब )
जवाब दादन लोरक चाँदा रा
( लोरकका चाँदको उत्तर )
मान भयेउँ चाँदा तिहि जोगू । सर दइ खेलेउँ चित घर मोगू ॥१
काट गहेउँ अस सोवा सारी । खांढ पेम दोइ कीन्हेउँ मारी ॥२
आविस फादि कीन्ह दोई आधा । आवसु चाँद में आपुहि साधा ॥३
पिरह दगध हौं वो तों कीन्हा । जरत नीर तिइ ऊपर दीन्हा ॥४
अन छाड़तँ बिरह कँ झारा । पानी के हौं रहेउँ अधारा ॥५
कहैं धिरत सब आपन, आप जो पूछहु पास ।६
अधर घर के पेरें, तिहि रंग बारें रात ॥७
२२१
( रीड्स १०३अ )
गुफ्तने चाँदा हिकायते मैना बा लोरक
( चाँदका लोरकसे मैनाकी प्रार्थना )
सुरग सेज मरि फूल बिछावसि । फेँवल फली तस मना रावसि ॥१
अस घनि छाड़ जो अनतँ धावा । किये सनेह तो हँइ छुटकारा ॥२
भँवर फूल पर रहइ लुभाइ । रमल बाकहि फिरि नहि जाइ ॥३
काइ लाग तूँ कुवरी करमी । सनेह के लिलार फूँट न धरमी ॥४
अरे लोर हूँ फिरँ परावमु । तिहँ पराउ जहाँ कछु पावसु ॥५
का अछत हाँ पाउडर, कें तू लोर धोरायसि ।६
कें सनेह महँ झरँबयस, जिग भावइ तित जायसि ॥७
टिप्पणी-(१) अनतँ—अन्यत्र ।
(३) बाकहिं—दशन । फिरि—लौटकर ।
(५) परावमु—भुलावा देता है; बहकाता है। पराउ—दरवाजा ।

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