चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९९
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( रीकेण्ड्स १५ )
बेकरार शुदने चाँदा सब कबाले इश्क लोरक
( लोरकके प्रेममें चाँदकी विकलता )
परी गनेझ सेज न भावइ । रैन चाँद बिइफइ झुपलावइ ॥१
कहु विहिँ सुरुज कवन पर बसा । मिख सर चढ़ा पीव मोर हसा ॥२
जहिँ कहुँ होइ सिंह आइ पुलाबहु । सुरुज आनि सेन बैसावहु ॥३
चाँद मरत लै सुरुज जियावइ । तू का करसि मोसें हुत आवइ ॥४
आनि विरस्पत सूंपा सरनाँ । रात देबस आइ मँह मरनाँ ॥५
अग दाइ मन चटपटी, घर बाहर न सुहाइ ।६
चाँद न जिये भानु बिनु, आनु बिरस्पत जाइ ॥७
टिप्पणी—(१) बिहफइ—बिहइ पाठ भी सम्भव है। दोनो ही निरस्पत (बृहस्पति)
का देशज रूप है ।
(७) भानु—सूरज । यहाँ तात्पर्य लोरकसे है । भानु—से भानो ।
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( रीकेण्ड्स १५१ )
पेकन । दर बेकरारी चाँदा गोबर
( चाँदकी व्याकुलता )
हां निमि चाँद सुरुज कप पावडें । देबस होइ चढ़ि सरग मोलावउँ ॥१
पाँधे पँवर पँवरिया आगहिँ । तमकत पीर दड़ि डर भागहिँ ॥२
तो यहिँ कहाँ ईत पोसाऊ । रैन करैंट हिय उठे सताऊ ॥३
पाउम रात डगि अँधियारी । कितहुत सुरुज हँकारउँ नारी ॥४
जा मन रुचि माइ पियारा । भुरँग आंत किद्दि पाऊगुबारा ॥५
दसम भाग तुम्ह माधन, इहूँ जियं के आस ।६
चाँद सुरुज म पिगउप, पाँहु भाग बिलाम ॥७