चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 212, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें१८४
१७५
( रीकेन्स १३३ )
एक साल परसीदने लोरक बुत रा, व आमदने चाँदा व सहेलियान दर्रॉ
( लोरकका एक साल तक मन्दिरमें तप करना : चाँदा
सहेलियोंके साथ आना )
एक बरसि लोरक मढ़ि सेवा । चाँद सनेह मनायसि देवा ॥१
कातिक परब देवारी आई । दार परी रितु खेले गाई ॥२
चाँद बिरस्पत लीन्ह हँकारी । आवहु देखै जाँहि देबारी ॥३
सखी सात एक गोहन लागीं । रूप सरूप सुभागिन मार्गी ॥४
अबरत चाँद चली लै तहाँ । गाएँ देवारी खेलैं जहाँ ॥५
सुरन फूल चाँदा लै, एक हुत मेला आइ ।६
पहिरत हार टूटि गा, मोतिह गये छरियाइ ॥७
टिप्पणी-(४) सात-साठ पाठ भी सम्भव है ।
(५) अबरत-एक हुत पाठ भी सम्भव है ।
(६) एकहुत-अबरत पाठ भी सम्भव है ।
(७) छरियाइ-बिखर गये ।
१७६
( रीकेन्स १३४ )
शिकस्तने हारे मुरवारीदे चाँदा दर बुतखानये व बर्गफदन सहेलियाँन
(चाँदका मोती-माल टूटना और सखियोंका मोती बटोरना )
समर मोतिइ लैँ घोइ पानी । चाँद कलफ चितहि लजानी ॥१
सननि जो पूछि तो कस कहहूँ । कवन उतर उन ऊपर देउँ ॥२
पोता सखिह छाँइँ मढ़ि लीजै । हार पिरोइ चाँद कहँ दीजै ॥३
आइ बिरस्पत हेरि हँकारी । चाँद बचन सुन भइ मँघियारी ॥४
मढ़ि सुहाउ आँ छाएँ सुहाइ । चाँद सरी लै पैठी जाइ ॥५
मानिक मोति पिरोयहिं, गचि गचि पार हार ।६
पैठ चाँद बिरस्पत, सूरूज मढ़ि दुआर ॥७