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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 208

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(रीट्सबर्ग १२७)
मना कर्दने बिरस्पत लोरक रा कि इन हिकायत न गोयद
(बिरस्पतका इस बातको छिपा रखनेको लोरकसे कहना)
सुनु लोरक अस पात न कहिये। जो कहै इँह देस न रहिये ॥१
यह तो आइ महर के जिया। चाँद नाउँ चौराहर दिया ॥२
सो तैं दीख बीजु बरियारी। लखैं तोर चितै गई न मारी ॥३
तरइँह चाफर सेज बिछावहिं। सपनैं नखत निसि पहरे आवहिं ॥४
मन कै सांक हिंयेहुत धोवहु। अँखैं मूँज सुख निदरा सोवहु ॥५
इव राजा के दुआर, औ निसि सरग असेर ।६
जिहँ का राज पिरिय में, तिहँ तू गरब न हेर ॥७
टिप्पणी-(४) तरइँह-तारागण । सपनै-सभी।
(५) अँखैं मूँज-या पीकर।
१७०
(बम्बई १६; रीट्सबर्ग १२८)
मिन्नत कदन लोरक पेश बिरस्पत
(लोरक्का बिरस्पतसे अनुनय)
चाँद क उतर बिरस्पत कहा। सुरुज दुहूँ पायन पर रहा ॥१
आजु बिरस्पत सुदिन हमारा। मुस्ताकॅवल जिहँ देखि तुम्हारा ॥२
कहु सो बात जिहूँ होइ पिरावा। भल ओ करैं भलाई पावा ॥३
कै मिस लै मोहिं आन जियावहु। कै सो मॅत्र-बिधि आज जियावहु ॥
किरपाव दम नव मूँह मेरा। पाँय परतें बिरस्पत ठेला ॥५
पाँय न टतु बिरस्पत, हा वो पर तुम्हार ।६
बचन तार मँहि आसद, खसि न सीसँ हमार ॥७