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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 207

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( रौकन्ट्स १२५ )
खुरने लोकिन बिरस्पत रा बर महक व दीदने बिरस्पत लोरक रा
( बिरस्पतका घरके भीतर जाकर लोरकका देखना )
पल खोलिन तोर कहाँ रोगी । मकु औखद जानउँ यहि जिउकी ॥१
सेजइ खोलिन लोरक ठाऊँ । देखसि क्या सीस धड़ पाऊँ ॥२
सुरुज भरहिं बिरस्पत आइ । नैन उघार चँदर बिहसाइ ॥३
गुनि गुनि देखि अग कै पीरा । कठन गरह करिरहै तुम्ह पीरा ॥४
यह गुन गुनी तिरी परछाना । यह बियाधि न आखद जाना ॥५
महर भंडार भंडारी औ चाँदा कँ भाइ ।६
नैन उघार मात कहु, आयउँ आइ भुलाइ ॥७
टिप्पणी—(१) मकु = कदाचित ।
(५) बियाधि—(स व्याध) रोग । औखद—औषधि ।
१६८
( रौकन्ट्स १२२ )
दूर सुरने लोकिन व गुप्तने लोरक हिदायते दीदने चाँदा बा बिरस्पत
( लोकिनका हट जाना और लोरकका बिरस्पतसे चाँद-दर्शनकी बात कहना )
बननि जो चाँद कइ बोल आहा । सहसकरों सुरुज परकासा ॥१
कहसि अननि यह मदन कहाँ । तार लाव सर्जास अहीं ॥२
खोलिन बाइ और तह ठाढी । लारक पीर हियँ कँ काढी ॥३
जिहिं दिन हूँ बउनार भुलाना । महर मंदिर काहू दिखरावा ॥४
सो जिउ लगइ कही न आइ । दिन जिउ भयउँ परेउँ पहराइ ॥५
मोगहरू मपूरन, चाँद जात परगाम ।६
पीतु चमरु पइ चमरी बैठि घाघहर पास ॥७
टिप्पणी—(३) पीर—हृदय व्यथा ।
( ) पहराई—बहकर गिरना ।