चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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( रोकेन्दम् १ १)
दर आमदने चाँदा बर बामारे कस व दीदन तमाशा लोरक व हुयने
बिरस्पत रा वा खुद
(बिरस्पतके साथ चाँदका महलकी छतपर जाकर लोरकका
सुरूप देखना)
चाँद धौराहर ऊपर गयी । घेरि बिरस्पत गोहन लगी ॥१
परी साँझ जग मा अँधियारा । चाँद मंदिर घइ गइ उजियारा ॥२
सो कस आहु जें गोबर उघारा । कवन बीर जिहूँ कटक संघारा ॥३
कौन मनुस जिहूँ कीन्ह हनाँ । धन सो जननि अस जे जनाँ ॥४
पूछिउँ धाइ बचन सुन मोरा । इहँ दर कौन सो कँकूँ लोरा ॥५
कवन रूप गुन सुन्दर, आँखौं बिरस्पत तोहि ।६
साध मरस हों बीरन, लोर दिखायहु मोहि ॥७
टिप्पणी—(१) गोहन—साथ ।
(२) मंदिर—आजकल मंदिरका प्रयोग देवस्थानके लिए किया जाता है;
पर मध्यकालीन साहित्यम सुन्दर भवन और राजपुरुषोंके आवासको
मंदिर कहा गया है। बाणने महासामन्त स्कन्दगुप्तके मंदिरका उल्लेख
किया है।
(३) उघारा—उद्धार किया ।
(७) साध—इच्छा ।
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( रोकेन्दम १ ४। फारसी)
निशानी नमूने बिरस्पत चाँदा रा अज जवासे सूरते लोरक
(बिरस्पनका चाँदका लोरकका रूप बतलाना)
लागइ चाँद सुरुज कें जोती । कुण्डर सोन देंह गजमोती ॥१
बैंदर तिलार' धरा अनु लाइ । चमक घसीमी अतइ सुहाई ॥२
शृगिषा बेस रंक सह आइ । ऊँक छीन कोने पचमाइ' ॥३