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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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घोटहिं महावत आँकुस गहैं। पन कुंजरैं डर राख न रहैं ॥४
सावन मेघ ओनइ जनु रहे। पखरे कीनर परिखहिं पड़े ॥५
बीजु माँव घन परे, परे छाएँ रन आइ ।६
उठे खेह दर पौदर, सूरज गयउ सुझाइ ॥७
मूलपाठ—१—नाच ।
टिप्पणी—(१) औनइ—घिर ।
११७
( बम्बई ३६; रीफेण्ड्स * )
रूजे दुवम राय रूपचन्द कसदे हिसार करदन व बीरून आमदने महरा बग
कदन उफ्तादन
( दूसरे दिन राव रूपचन्दका कुरांकी ओर आना और महरका युद्ध
के लिए बाहर निकलना )
राउं रूपचन्द गढ़ होइ पावा¹ । राहैं महर दर आपुन सावा ॥१
फिर संजो भाँठहिं² हथबासा । फेंवरू धँवरू³ पाउ हुलासा ॥२
पाँठ कहा अर सोंको आही । मिया मरसि उठु घर बाही ॥३
फेंवरू तदपि सांड कें⁵ फाढ़ी । झेसस करी सम⁶ देखें ठाढ़ी ॥४
पाँठ वाफ खड़[ग*] गहि मारा। फिरें मामद⁷ धढ़ गयउ उपारा॥५
दीठि भुलान खड़ग वो चमका, हाथ फिरें हथ जोत ⁹ ।६
लाग गाँठ पाँटा कर, कँवरू गा भुइ लोट¹¹ ॥७
पाठान्तर—रीगेण्ट्स प्रति—
शीर्षक—नमूदार शुदने हरदू फौज्हा ब हम कदंने कँवरू बा बाँटा व
कुश्ता शुदने ऊ (दोनों सेनाओ का सामने सामने आना और कँवरू-बाँठा
का युद्ध; कँवरूका मारा जाना) ।
१—रहा । २—यह शब्द छूटा है। ३—गाउ। ४—मंजोर। ५—
ढाँड । ६—भागी। ७—ती। ८—मद । —को । ९—मग।
११—फिरे हाथ हथ जूट । १२—सुन ।
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