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सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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और उत्तर मूल निवास स्थान का नाम था। वहाँसे आने वाले
घोड़ों को तुगार कहते थे। पीछे यह अश्वरका पर्याय बन गया।
(२) हंस—यह नाम हमें अश्वों की सूची में अन्यत्र कहीं देखने को नहीं
मिला। हो सकता है हंस के समान सफेद घोड़े को कहते रहे हों।
हंसोली—सम्भवतः इसे ही जायसी ने हाँसुल कहा है (पदुमावत
४७।२)। ऐसा घोड़ा जिसका शरीर महुये के रंग का और चारों पैर
कुछ कालापन लिये हों; कुम्मैत हिनाई।
भैंवर—भौंरे के रंगका घोड़ा; मुश्की।
हिना—सम्भवतः मेहदीके रंगका अश्व।
हिंगारे—इसे ही सम्भवतः जायसीने राय कहा है (पदुमावत,
४ ६।१)। फरहंग इसहानाव (पृ १८) के अनुसार कबूतरी रखा
के समान सफेद रंगके घोड़ेको हिंगा कहते थे। नकुल कृत शालिहोत्र
(पृ १७) में हिंगाका वर्णन इस प्रकार है :
बिन सेनी तन पांडुरो होइ एक सम अंग ।
जूल्हे रंग न देखिये तासु कहिने हिंग ॥
(३) उंदिर—(सं —उन्दौर) बंगाली चूहे और नेवलेके रंगसे मिलता
हुआ घोड़ा। सम्भवतः इसे ही संजाब या सिजाब भी कहते थे।
संधूर—सम्भव बादामी रंगका घोड़ा।
(४) नीर—नील नीले रंगका घोड़ा। हरिवाह—सम्भवतः अन्यत्र
उल्लिखित हरितोंत (४।२) और हरिवाह एक ही प्रकारके घोड़ेके
लिए प्रयुक्त हुआ है। हरे रंगका घोड़ा, सब्जा। इस रंगका घोड़ा
अत्यन्त दुर्लभ है।
( ) बोर—रहाटनगासके फारसी कोष (पृ २ ६) के अनुसार लहरके
रंगका घोड़ा। फरहंगनामा हाशिमीका कहना है कि हिम्बक लोग
बोरको घोज़ बच कहते थे (पृ १७)। गर्रया—(गर्र गर्रा) श्वेत
और लाल रंगकी खिचड़ी बालोंवाला घोड़ा।
(६) पौव—पवन। बा—बापु। रास—बागडोर।
(७) बारू—सोलहे कोस किन्तु मीलसे बड़ा दूरी नापनेकी इकाई।
धावै—धाव्यानयेवै।
११३
( रौलैन्छंद )
सिवते रुपादाने जयौ
( अस्वारोहियोंका वर्णन )
कसि कसि पड़े सम असवारा। जियत न देखेउँ जिंहि कर मारा॥१