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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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चोवइँ चाँन देखि पाँ लागहिं । पाप केत परसहिं फर मागहिं ॥४
रूप पुतरि गइ दस नख लावा । तरुवहिं रकत भू सर फलि आवा ॥५
पायि परौं मुख जोऊँ, सो धनि उतर न देइ ।६
सुनत राठैं बिसँमरि गा, मर मर साँसें लेइ ॥७
पाठान्तर—कैथव प्रति—
इस प्रतिकी उपलब्ध फोटोम कुछ स्याहीसे खिली पङ्क्तियाँ अत्यन्त
अस्पष्ट हैं । फलतः श्रीयक और तीसरी पङ्क्तिका पाठ सम्भव न हो
सका । पृष्ठ भ्रष्ट होनेसे पङ्क्तियाँ ५-७ भी अप्राप्य हैं ।
१—रम्म । २—परताप । ३—गद । ४—औ सम्तोक हिय तर अस
धरा । ५—विमोर्दैहि । ६—जोहि । ७—लागी । ८—भागी (पूर्व
पद के अनुसार) । ९—तड़फन ।
९२
( रीकण्डस ५२५ )
सिफ़ते पाव व रफ़्तारे पाँवा
( पग और गति वर्णन )
हँस गँवन ठुम ठुमकत आवइ । चमक चमक धनि पाठ उषावइ ॥१
झनक झनक पाँ धरती धरा । घमक घमक जनु सुगति मरा ॥२
सेल मन्हान सों धाँदा आवइ । आनौ फीनरि भगु उघावइ ॥३
सर सुइ धरतँ चाँद धरि पाऊ । नान हुवै न फाइँउँ गाऊ ॥४
पागै धूर नैन भरि आँजौं । सीम फाड़ि दुइ तरुवा माँजौं ॥५
चलत चाँद चित लागा, मनहुत उतर न काउ ।६
पाँयहि झाय न पहुँचे, हँस हँस रोवइ राउ ॥७
टिप्पणी—(१) उषावइ—उगाती है ।
(३) पौ—पाव, पैर ।
(४) सुई—पृथ्वी । नानहुवै—दुबलेपन से ही ।
(५) धूर—धूलि । आँजौं—अञ्जन की तरह लगाऊँ । तरुवा—हात,
पैर का निचला भाग ।