चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८
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( रीकैण्ड्स २१ )
गुफ़्तम फ़रने पहूम बर चाँदा दर ब रवा दादन बराब महर रफ्तन
( सासका चाँदेसे क्रुद्ध होकर महरके घर चले जानेको कहना )
तोरे आघ में तहिया जानी । बात कहत तूँ मुँहि न छजानी ॥१
तोकों काही कीन्ह पसेऊ । बिन दहि मथें कै निसरे घीऊ ॥२
बाबन मोर दूध कर पोवा । निस दिन भावन तों संग सोवा ॥३
तूँ अचरैत न देखसि काहू । बिन धहि कस नघइ गयाहू ॥४
सौखहि भावन होइ सयाना । और पियाहि के है तो आना ॥५
जो तँ जेहसि मैकेँ, अमेँ पठै सन्देस ।६
कहाँ कर तूँ झाँगर बिटिया, आरों सोइ देस ॥७
५०
( रीकैण्ड्स ५ )
तस्वीदने चाँदा कुश्रादार रा ब फिरिस्तादने तुष्यारी बर स्तिर
( चाँदाका ब्राह्मणको बुलाकर पिताके पास अपना कष्ट कहलाना)
चाँदहि गरुर भयउ घरबारू । चेरी बाँभन आइ हँकारू ॥१
आइ सो बाँभन दीन्ह असीसा । चन्द्र बदन मुख फेँफर दीसा ॥२
परहँसि कहि संदेस पठावा । बोल थाक हियँ पघरावा ॥३
नैन सीप जस मोतिहँ भरे । रोयसि चाँद आँसु जस ढरे ॥४
धोली चीर भीज गा पानी । जनु अभरन सों गांग नहानी ॥५
बाँभन कहुतु महर सों, मोरै दुख कै बात ।६
भाउ कहार सुखासन, बेगि पठउ परभात ॥७
५१
( रीकैण्ड्स २१ )
बाज नमूदने ब्रॉहमन बर महर आयनीदने महर चाँदा रा ब बाछन बर खान
( ब्राह्मणका महरसे सन्देश कहना और महरका चाँदाको अपने घर बुलाना )
बाँभन जाइ महर सों कहा । हियें लाग हीं जरतईं रहा ॥१