चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 134, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें१७
सोन रूप भल (अमरन) आई । दिन-दिन पहिरहु चीर धोआई ॥४
जौँलहि भाषन होइ सँओगा । पान फूल रस फरिदै भोगा ॥५
ओ तुम्ह रापि महर के बेटी, अजहुँ हूर न लआइ ।६
ताथ दूध अनटहु, रहि चाँदा पीय मिलाइ ॥७
मूल पाठ—४ म० फिर पहिर म भल फिर-फिर आइ है। पर इनमें से कोई भी
प्रसंग संगत पाठ नहीं है । हमारी समझमे मूल पाठ अमरन रहा
होगा । जान पडता है लिपिक आरम्भका अधिक और अन्तका भून
लिखना भूल और बीजके भरको दो बार लिख गया है ।
टिप्पणी—(१) साटू—सत्तू भुने हुए चने, जौ, मटर आदि का मिश्रित आटा
जिसे पानीमें घोल अथवा सान कर नमक अथवा शकर मिला कर
खाया जाता है । यह पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहारके लोक-जीवन
में बहु प्रचलित भोजन है ।
(६) हूर—हुड़ ।
(७) ताथ—गर्म ।
४८
(रौकंग्धूम २८)
जवाब दादने चाँदा बर ससुअ रा
(चाँदाका सासको उत्तर )
तुम्ह हूँ सास अतहिँ गँवानी । राखहु दूध पियायहु पानी ॥१
दही न देइ खाँउ जिहँ लाइ । महरँ कै हौँ परी अदाइ ॥२
सोन रूप का हमरे नाहीं । अनौँ सइज जेउनारहि खाहीं ॥३
तुम्हरे घी जो सीरै थाहा । पीठ न पूँछत पोलहु फाहा ॥४
अबलहि पैँ हुर आपन घरा । काम लुपुध बिरहूँ धन जरा ॥५
निसि अँधियार नीर घन, पीज लबइ सुँइ लागि ।६
सेज अकेलि फाटि मोरि हिरदै, ओ जो देउतँ जागि ॥७