चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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( रौकेन्स ० )
सिफत बहके-बाहर बस वस्ना महल्ल दरत्रों शाहरे-मज़कूर
( उक्त नगरके निवासियोँका वर्णन )
बाँभन खत्री बसहिं गुबारा । गहरवार औ आगरवारा ॥१
बसहिं तिवारी औ पचवानौं । घागर धूनी औ इजमानौं ॥२
बसहिं गँधाई औ बनजारा । सात सरावग औ बनवारा ॥३
सोनी बसहिं सुनार बिनानी । राउत लोग बिसाती आनी ॥४
ठाकुर बहुत बसहिं चौहानों । परजा पौनि गनति को जानौं ॥५
बहुत आस दरभर अधह, खोरहिं डीढ न बाइ ।६
सँस पा देस गोवर, मानुस चलत भुलाइ ॥७
टिप्पणी-(१) बाँभन-ब्राह्मण । खतरी-खत्री अथवा क्षत्रिय । गुबारा-आभीर
अहीर । गहरवार-गहड़वाल राजपूतोंका एक वर्ग । आगरवारा-
अग्रवाल वैश्योंका एक प्रमुख वर्ग ।
(२) तिवारी-त्रिपाठी ब्राह्मणोंका एक वर्ग । पचवानौँ-पंचम वर्ण ।
घागर-निम्न वर्गकी एक जाति जिनकी स्त्रियाँ जन्मके अनन्तर
शिशुके नाल काटने और सूतिका-गृहके अन्य काम करती थीं ।
इजमानौं-इमाम, साहु ।
(३) गँधाई-गन्धी, तैल सुगन्धितका काम करनेवाले । बनजारा-
( स वाणिज्यारक > बाणिज्जारक ) व्यापारी, यह सार्थवाह
शब्दका मध्यकालीन पर्यायवाची था और इसका प्रयोग उन
व्यापारियोंके लिए किया जाता था जो टाँड लाद कर ( सामूहिक
रूपसे माल लाद कर ) दूर देशोंसे व्यापार करने जाया करते थे ।
सरावग-( स श्रावक ) जैन धर्मावलम्बी गृहस्थ । बनवारा-
बरणवाल वैश्योंकी एक जाति पनवारा पाठ भी सम्भव । उस समय
इसका अर्थ होता-पानवाला बरई ।
(४) सोनी-सोनेका काम करनेवाले । बिनानी-विज्ञानी । राउत-
( स -राजपुत्र > राउत > राउत् > राउत ) राजपूतोंका वर्ग
विशेष मूलतः यह राजघरौँसे सम्बन्ध रखनेवाले लोगोंकी उपाधि
थी । बिसाती-फेरी लगाकर बेचनेवाले व्यापारी ।