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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 115

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पाठान्तर—१-आवा । २-सुहाबा ।
टिप्पणी—दीवेड्स प्रतिका यह पृष्ठ फटा है जिसके कारण अंतिम तीन चमक्रौकी
पूर्व अर्द्धालियों तथा घत्तारो अभिसाख नष्ट हो गया है । पंजाब प्रतिका
उपलब्ध फोटो भी अत्यन्त अस्पष्ट है जिसके कारण पप्ताके नष्ट अंशोंका
समुचित उद्धार सम्भव न हो सका ।
(१) सफरी—मउली । सुभर पात भी सम्भव है—सुभर सरोवर हया चंकेि
कराहिं (पद्मावत) ।
(२) अवगाह (सं —अगाध वकारके प्रस्लेवसे अवगाह)—गम्भीर,
अथाह । बुडू—समाप्त हो गया ।
२३
( रीवेड्स ४ )
सिफते जानावरों दर औं हौज गोयद
( सरोवरके जन्तुओंका वर्णन )
पैरहिं हंस माँछ महिंराहीं । चकवा चकवी केरि कराहीं ॥१
दबला ढेंक बैठ झरपाये । बगुला बगुली सहरी खाये ॥२
बनछेद सुबन पना जल छाये । अरु जलकुक्कुरी चर छाये ॥३
पसरी पुरइं कूल मतूला । हरियर पात बस रात फूला ॥४
पोंछी आइ बेस कर परा । फार फँरजवा अलहर भरा ॥५
सारस कुरलहिं रात, नींद तिल एक न आवइ ।६
सबद सुहाव कान पर, जागहिं रैन बिहावइ ॥७
टिप्पणी—(१) ढेंक—भोजन बगुला । सहरी—सफरी मछली ।
(४) पसरी—(ध प्रकार) फैली । पुरईं—पुरइन (सं पुण्ड्रिनी), कमल-
की बेल । हरियर—हरी । पात—पत्ती । रात—(स रक्त) लाल ।
(५) पोंछी—पक्षी । बेस कर (मुहावरा)—नाना प्रकारके । कार—
काला । फँरजवा—करज पक्षी विशेष ।
(६) कुरलहिं—रहते हैं ।
२४
( रीवेड्स ५ )
सिफत रबक दर गिर्द शहर गोबर गोयद
( गोबर नगरकी खाईका वर्णन )
खाई देख गोवर [के] खाइ । पुरिस पचास फेर गहराई ॥१