चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८७
(६) बर—बड़ । पीपरा—पीपल । मंदिकी—इसकी । सेवार—अधिक ।
(७) बारी—बगीचा ।
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( रीकैण्ड्स २ )
सिफते बुतखानः बर हौज व मानदन जोगियान मकान व अस्नान हरु
(सरोवरके ऊपर स्थित मन्दिरका वर्णन जहाँ चौ-पुदथ जोगी रहते हैं।)
नारा पोखर कुण्ठ बनाये । मढ़ि देव जेहि पास उठाये ॥१
अनफाट नितइ आवहिं तहाँ । औ मगवन्त रहें तिह महाँ ॥२
निष [अ - - - ] छाये । पुरुख नाँउँ तिह ठौर न जाये ॥३
भेरा डँवरू ढाक बजाये । समद सुहाष इँदर मन माये ॥४
जोगी सहस पाँच एक गावहिं । सींगी पूरहिं भसम चढावहिं ॥५
सिद्ध पुरुख गुन आगर, देखि लुभाने ठाउँ ॥६
कहत सुनत अस आनै, दूनि चलि देखें जाउँ ॥७
टिप्पणी—(१) मढ़ि-मण्डप, देवस्थान ।
(४) भेरा-मुँहसे फूँककर बजानेवाला बड़ा बाजा । डँवरू—डमरू ।
ढाक-टंकार।
(५) सींगी-(सं श्रृंग) सींगका बना फूकनेका बाजा ।
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( रीकैण्ड्स ३ : पंजाब [१] )
सिफते शेज व स्तायशे आबे उ गोयद
(सरोवर और उसके निर्मल जल का वर्णन)
सरवर एक सफरि भरि रहा । झरनों सहस पाँच तिह पहा ॥१
अति अवगाह न पायइ थाहा । बातैं चूक सराहउँ काहा ॥२
[बास केमूरैं कह नित आवई] । देखत मोतीधूर सुहावई ॥३
[हुँवर लाख दोइ पानी चाहैं] । तीर पैठि ते लेहिं भर आवैं ॥४
[ठाँठ ठाँउ बैठे रखपारा] । पोर नहाइ न कोऊ पारा ॥५
[आप होइ महरहिं कै, - सों कह ] नी पाट ।६
[पाप रूप सरवर कै, रोवत माँ]घी घाट ॥७