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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

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३२ बुल्ला साहिब का शब्दसार
॥ साखी ॥
आठ पहर चौंसठ घरी, जन बुल्ला धर ध्यान ।
नहिं जानो कौनी घरी, आइ मिलैं भगवान ॥ १ ॥
आठ पहर चौंसठ घरी, भरो पियाला प्रेम ।
बुल्ला कहै बिचारि कै, इहै हमारो नेम ॥ २ ॥
जग आये जग जागिये, पगिये हरि के नाम ।
बुल्ला कहै बिचारि कै, छोड़ि देहु तन धाम ॥ ३ ॥
अच्छै१ रंग में रंगिया, दीन्ह्यो प्रान अकोल२ ।
उनमुनि मुद्रा भस्म धरि, बोलत अमृत बोल ॥ ४ ॥
बोलत डोलत हँसि खेलत, आपुहिं करत कलोल ।
अरज करौं बिन दामहीं, बुल्लहि लीजै मोल ॥ ५ ॥
बिना नीर बिनु मालिहीं, बिनु सींचे रंग होय ।
बिनु नैनन तहँ दरसनो, अस अचरज इक सोय ॥ ६ ॥
ना वह टूटे ना वह फूटे, ना कबहीं कुम्हिलाय ।
सर्ब कला गुन आगरो३, मोपै बरनि न जाय ॥ ७ ॥
(१) अक्षय । (२) अँकवार, गोद । (३) श्रेष्ठ ।