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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 65, कुल 760 में से

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पृष्ठ 65

वास्तुविद्याध्यायः ३७
त्र्यस्रे एकाशीतिपदो वास्तुनरः
पू
दितिः | शिखी | पर्जन्यः | जयन्तः | इन्द्रः | सूर्यः | सत्यः | भृशः | अन्तरिक्षः | अनिलः
अदितिः | दितिः | शिखी | पर्जन्यः | जयन्तः | इन्द्रः | सूर्यः | सत्यः | भृशः | अन्तरिक्षः | अनिलः | पूषा
अदितिः | भुजगः | आपः | आपवत्सः | अर्यमा | सावित्रः | पूषा | वितथः
भुजगः | पृथिवीधरः | ब्रह्मा | सविता | वितथः | बृहत्क्षतः
सोमः | सोमः | पृथिवीधरः | ब्रह्मा | ब्रह्मा | ब्रह्मा | विवस्वान् | बृहत्क्षतः | यमः
भल्लाटः | भल्लाटः | राजयक्ष्मा | ब्रह्मा | इन्द्रः | विवस्वान् | यमः | गन्धर्वः
मुख्यः | मुख्यः | रुद्रः | ब्रह्मा | मित्रः | भृङ्गराजः | गन्धर्वः
उ | नागः | नागः | जयः | मित्रः | मृगः | भृङ्गराजः | द
रोगः | रोगः | पापयक्ष्मा | पिता | मृगः
पापयक्ष्मा | शोषः | दौवारिकः | पिता
शोषः | असुरः | सुग्रीवः | दौवारिकः
असुरः | वरुणः | कुसुमदन्तः | सुग्रीवः
वरुणः | कुसुमदन्तः
प
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