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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 635, कुल 760 में से

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पृष्ठ 635

ग्रहगोचराध्यायः ६०७
न्यासः— स ज स ल न स ज गु
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भ न ज ल गु स ज स ज गु
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अधुना गोचरोक्तस्य फलस्य रविभौमयोः शशिसौर्योश्च प्रधानकालं गीत्युपगीतिलक्षणं
चाह—
रविभौमौ पूर्वार्धे शशिसौरौ कथयतोऽन्त्यगौ राशेः ।
सदसल्लक्षणमार्यागीत्युपगीत्योर्यथासङ्ख्यम् ॥४९॥
सूर्य, मंगल राशि के पूर्वार्ध में एवं चन्द्र और शनि