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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 545, कुल 760 में से

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पृष्ठ 545

शाकुनोत्तराध्यायः ५१७
अन्येष्व्वाह—
प्राग्लग्नगे नं जलगे णमाहुरस्तं गते टं नभसि स्थिते तम्।
प्राग्लग्नगे खं जलगे यमाहुरस्तं गते छं नभसि स्थिते फम् ॥२८॥
मिथुन लग्न में षष्ठ नवांश हो तो मिथुन में षष्ठ नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का
पञ्चम अक्षर नकार, चतुर्थ राशि ( कन्या ) में षष्ठ नवांशाधिपति बुध के वर्ग का पञ्चम
अक्षर णकार, सप्तम राशि ( धनु ) में षष्ठ नवांशाधिपति बुध के वर्ग का प्रथम अक्षर
टकार और दमश राशि ( मीन ) में षष्ठ नवांशाधिपति के वर्ग का प्रथम अक्षर तकार
आता है। मिथुन लग्न में सप्तम नवांश हो तो मिथुन में सप्तम नवांशाधिपति मंगल के
वर्ग का द्वितीय अक्षर खकार, चतुर्थ राशि ( कन्या ) में सप्तम नवांशाधिपति शुक्र के
वर्ग का द्वितीय अक्षर छकार और दशम राशि ( मीन ) में सप्तम नवांशाधिपति शनि के
वर्ग का द्वितीय अक्षर फकार आता है॥२८॥
मिथुनस्य षष्ठनवांशकाधिपतिर्जीवस्तदीयवर्गात् पञ्चममक्षरं नकारमापतति। कन्यायाः
षष्ठनवांशकाधिपतिर्बुधस्तदीयवर्गात् पञ्चममक्षरं णकारमापतति। धन्विनः षष्ठनवांश-
काधिपतिर्बुधस्तदीयवर्गात् प्रथममक्षरं टकारमापतति। मीनस्य षष्ठनवांशकाधिपतिर्जीवस्त-
दीयवर्गात् प्रथममक्षरं तकारमापतति। अत एवोक्तम्—
प्राग्लग्नगे नं जलगे णमाहुरस्तं गते टं नभसि स्थिते तम्।
मिथुनस्य सप्तमनवांशकाधिपतिर्भौमस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं खकारमापतति। कन्यायाः
सप्तमनवांशकाधिपतिश्चन्द्रस्तदीयवर्गात् प्रथममक्षरं यकारमापतति। धन्विनः सप्तमनवांशा-
धिपतिः शुक्रस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं छकारमापतति। मीनस्य सप्तमनवांशकाधिपतिः
सौरस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं फकारमापतति। अत एवोक्तम्—
प्राग्लग्नगे खं जलगे यमाहुरस्तं गते छं नभसि स्थिते फम्। इति॥२८॥
अन्येष्व्वाह—
लग्ने जमोकारमथाम्बुसंस्थे गमस्तसंस्थे विदुरम्बरे बम्।
ठं लग्नगेऽन्त्ये हिबुकाश्रिते डं थमस्तगे दं नभसि स्थिते वै ॥२९॥
मिथुन लग्न में अष्टम नवांश हो तो मिथुन में अष्टम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का
तृतीय अक्षर जकार, चतुर्थ राशि ( कन्या ) में अष्टम नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का
नवम अक्षर ओकार, सप्तम राशि ( धनु ) में अष्टम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का
तृतीय अक्षर गकार और दशम राशि ( मीन ) में अष्टम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का
तृतीय अक्षर बकार आता है। मिथुन लग्न में नवम नवांश हो तो मिथुन में नवम
नवांशाधिपति बुध के वर्ग का द्वितीय अक्षर ठकार, चतुर्थ राशि ( कन्या ) में नवम
नवांशाधिपति बुध के वर्ग का तृतीय अक्षर डकार, सप्तम राशि ( धनु ) में नवम
नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का द्वितीय अक्षर थकार और दशम राशि ( मीन ) में
नवम नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का तृतीय अक्षर दकार आता है॥२९॥
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