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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

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पृष्ठ 483

शिवारुताध्यायः ४५५
या शिवा उच्चैः कृत्वा पूर्वमादौ घोरं क्रूरं वर्णमक्षरमुच्चार्य पश्चादनन्तरात् क्रोष्टुकस्य
शृगालस्यानुरूपं सदृशं क्रोशेद् ब्रूयात्। एवंविधा सा क्षेमं प्राह कथयति। क्षेमं लब्धपालनं
वित्तस्य चाप्तिं लब्धिम्। अथवा प्रोषितेन प्रियेण देशान्तरगतेन प्रियेण वल्लभेन संयोगं
प्राह कथयति।।१५।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ शाकुने शिवारुतं
नाम नवतितमोऽध्यायः ।।९०।।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA