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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 399, कुल 760 में से

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पृष्ठ 399

अथ मरकतलक्षणाध्यायः
अथ मरकतलक्षणं व्याख्यायते। तल्लक्षणं प्रयोजनं चाह—
शुकवंशपत्रकदलीशिरीषकुसुमप्रभं गुणोपेतम्।
सुरपितृकार्ये मरकतमतीव शुभदं नृणां विहितम् ॥१॥
इति श्रीवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां मरकतलक्षणं
नाम त्र्यशीतितमोऽध्यायः ॥८३॥
तोता, बांस का पत्ता, केला या शिरीषपुष्प के समान कान्ति वाले मरकत ( पन्ना )
को देवता या पितर के कार्य में धारण करने पर बहुत ही शुभ फल प्राप्त होता है॥१॥
इति 'विमला' हिन्दीटीकायां मरकतलक्षणाध्यायरुयशीतितमः ॥८३॥
यन्मरकतं शुकवंशपत्रसदृशं शुकपक्षसमवर्णं वंशपत्रसदृशं कदलीसदृशं श्यावपीतं
शिरीषकुसुमप्रभं शिरीषपुष्पतुल्यवर्णं श्वेतपीतं वा। एतेषामन्यतमवर्णोपेतं तच्च यदि गुणोपेतं
बहुगुणम्। बहुगुणाः स्निग्धः प्रभानुलेपी स्वच्छोऽर्चिष्मानित्यादिकास्तैर्युक्तं तथाविधं नृणां
पुंसां सुरपितृकार्ये देवकार्ये पितृकार्ये वाऽतीवात्यर्थं शुभदं विहितमुक्तमिति॥१॥
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ मरकतलक्षणं
नाम त्र्यशीतितमोऽध्यायः ॥८३॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA