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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

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३५६ बृहत्संहिता
का नाश होता है तथा शुभ लक्षणों से युक्त हीरे को धारण करने से वज्रभय, विष एवं
शत्रु का नाश तथा भोग की वृद्धि होती है।।१८।।
इति 'विमला'हिन्दीटीकायां रत्नपरीक्षाध्यायोऽशीतितमः ॥८०॥
अनिष्टलक्षणमशुभलक्षणसंयुक्तं वज्रं वज्रमणिः स्वजनानां बान्धवानां विभवस्यैश्वर्यस्य
जीवितस्यायुषः क्षयं हानिं जनयत्युत्पादयति। शुभलक्षणं वज्रमशनिभयं विद्युद्भीतिम्। विष-
भयम्। अरिभयं शत्रुभयं च नाशयति। भूभृतां राज्ञामुपभोगकरं भवति। केचिदुरुभोगकरं
विस्तीर्णभोगकरमितीच्छन्ति।।१८।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ वज्रमणिपरीक्षा-
नामाशीतितमोऽध्यायः ॥८०॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA