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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

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पृष्ठ 358

३३० बृहत्संहिता
स्त्रियों के परपुरुष से सम्बन्ध कराने में भिखारिन, संन्यासिन, दासी, धाई, धोबिन,
मालिन, दुष्ट स्वभाव वाली स्त्री, सखी, नायन—ये दूती होती हैं। ये दूतियाँ कुल के
मनुष्यों का नाश करने के कारण हैं। इसलिये प्रयत्नपूर्वक वंश, यश और मान बढ़ाने के
लिये उन दूतियों से स्त्रियों को बचाना चाहिये॥९-१०॥
भिक्षुणिकेति । भिक्षुणिका प्रसिद्धा व्रतस्था रक्तपटा स्त्री। प्रव्रजिता तपस्विनी स्त्री।
दासी कर्मकरी। धात्री स्तनदायिनी। कुमारिका कुमारी। रजिका वस्त्ररजकी। मालाकारी
पुष्पप्रदायिका। दुष्टाङ्गना सदोषा स्वगृहस्थिता दुःशीला स्त्री। सखी आली। नापिती नापितस्त्री।
एताः स्त्रीणां परपुरुषसम्बन्धे दूत्यो भवन्ति।
कुलजनविनाशहेतुरिति । यस्मादेता दूतयः कुलजनस्य निरवद्यवंशसम्भूतस्य
विनाशने शीलविध्वंसने हेतुः कारणं भवन्ति, अतोऽस्माद्धेतोस्ताभ्यो वंशस्य कुलस्य
यशसः कीर्तेर्मान