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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

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पृष्ठ 243

पुरुषलक्षणाध्यायः २१५
सुस्निग्धं मांसलं पृष्ठमभग्नं चाप्यरोमशम्।
सधनानां विपर्यस्तं निर्धनानां प्रकीर्तितम्।। इति।।३१-३२।।
अथ कक्षालक्षणमाह—
अस्वेदनपीनोन्नतसुगन्धसमरोमसङ्कुलाः कक्षाः।
विज्ञातव्या धनिनामतोऽन्यथार्थैर्विहीनानाम् ।।३३।।
पसीने से रहित, पुष्ट, ऊँची, सुगन्धयुक्त, समान तथा रोमों से व्याप्त काँख धनिकों
की होती है। पसीने से युत, अपुष्ट, नीची, दुर्गन्धयुत, विषम और रोमरहित काँख निर्धनों
की होती है।।३३।।
बाहुमूलतलं कक्षाशब्देनोच्यते। कक्षा अस्वेदनाः स्वेदरहिताः पीनाः समांसला उन्नता
उच्चाः सुगन्धाः शोभनगन्धाः समास्तुल्या रोमसङ्कुला रोमभिर्युक्ता धनिनामीश्वराणां विज्ञातव्या
ज्ञेयाः। अतोऽस्मादन्यथा विपरीतलक्षणाः सस्वेदना निर्मांसा निम्ना दुर्गन्धा विषमा रोम-
वर्जिता अर्थैर्विहीनानां धनरहितानां भवन्ति। तथा च—
निःस्वेदमांसलाः कक्षाः सुगन्धा रोमसङ्कुलाः।
धनिनां तु विजानीयान्निर्धनानामतोऽन्यथा।। इति।।३३।।
अथांसलक्षणमाह—
निर्मांसौ रोमचितौ भग्नावल्पौ च निर्धनस्यांसौ।
विपुलावव्युच्छिन्नौ सुश्लिष्टौ सौख्यवीर्यवताम् ।।३४।।
मांसहीन, रोमों से युत, भग्न तथा छोटे कन्धे निर्धन मनुष्यों के होते हैं तथा
विस्तीर्ण, अभग्न और परस्पर संलग्न कन्धे सुखी और बली पुरुषों के होते हैं।।३४।।
अंसौ स्कन्धौ निर्मांसौ मांसरहितौ रोमचितौ रोमव्याप्तौ भग्नौ स्फुटितावल्पौ निर्धनस्य
दरिद्रस्य। विपुलावव्युच्छिन्नावभग्नौ सुश्लिष्टौ सुसंलग्नौ सौख्यवीर्यवतां सुखिनां बलिनां
च भवतः। तथा च—
कदलीस्तम्भसङ्काशा अजस्कन्धाश्च ये नराः।
राजानस्ते विजानीयुर्महाकोशा महाबलाः।
निर्मांसरोमबहुला निर्धनस्य प्रकीर्तिताः ।। इति ।।३४।।
अथ बाहुलक्षणमाह—
करिकरसदृशौ वृत्तावाजान्ववलम्बिनौ समौ पीनौ।
बाहू पृथिवीशानामधनानां रोमशौ ह्रस्वौ ।।३५।।
हाथी के सूँड़ के समान वर्तुलाकार, जानुपर्यन्त लम्बे, सम तथा मोटे बाहु राजा के
होते हैं। रोमों से युत तथा छोटे बाहु निर्धन के होते हैं।।३५।।
बाहू भुजौ करिकरसदृशौ गजहस्ततुल्यौ वृत्तौ परिवर्तुलौ। आजान्ववलम्बिनौ जानु-
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