सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 106

७८ बृहत्संहिता
जहाँ वेल के वृक्ष से युक्त गूलर का वृक्ष हो तो उससे तीन हाथ दक्षिण दिशा में
तीन पुरुष नीचे जल की स्थिति होती है। यहाँ पर आधा पुरुष नीचे कृष्ण वर्ण का मेढ़क
निकलता है।।१८।।
बिल्वोदुम्बरयोर्यत्र योगो विल्व उदुम्बरवृक्षश्च यत्र समेतौ भवतः। तस्मिन् याम्येन
दक्षिणस्यां दिशि हस्तत्रयं विहाय त्यक्त्वा त्रिभिः सार्धैः पुरुषैरधोऽम्बुजलं भवेत् स्यात्।
अर्धनरे खाते कृष्णो मण्डूको दृश्यते।।१८।।
अन्यदप्याह—
काकोदुम्बरिकायां वल्मीको दृश्यते शिरा तस्मिन्।
पुरुषत्रये सपादे पश्चिमदिक्स्था वहति सा च।।१९।।
आपाण्डुपीतिका मृद्गोरसवर्णश्च भवति पाषाणः।
पुरुषार्धे कुमुदनिभो दृष्टिपथं मूषको याति।।२०।।
यदि काकोदुम्बरिका वृक्ष ( कटुम्बरि = 'काकोदुम्बरिका फल्गुर्मलपूर्जघने फले'-
त्यमरः) के समीप वल्मीक हो तो उस वल्मीक के सवा तीन पुरुष नीचे पश्चिम दिशा
में बहने वाली शिरा निकलती है। यहाँ पर खोदने के समय सफेद और पीली मिट्टी
निकलती है। उसके नीचे सफेद पत्थर और आधा पुरुष नीचे सफेद चूहा दिखाई देता
है।।१९-२०।।
काकोदुम्बरिका फल्गुवृक्षः, स यत्र दृश्यते तस्यां दिशि यदि समीपे वल्मीको वल्मीक-
कृतो मृत्स्तूपो दृश्यते, तदा तस्मिन्नेव वल्मीके शिरा भवति। सपादे पुरुषत्रये खाते अधः
सा च शिरा पश्चिमदिक्स्था वहति।
अथ चिह्नानि आपाण्डुपीतिका मृत्, पाण्डुरा पीतवर्णा च मृत्तिका प्रथमं भवति,
ततो गोरसवर्णः शुक्लवर्णः पाषाणोऽश्मा भवति। पुरुषार्धे खाते कुमुदनिभः श्वेतवर्णो
मूषक आखुर्दृष्टिपथं दर्शनं याति दृश्यत इत्यर्थः।।१९-२०।।
अन्यदप्याह—
जलपरिहीने देशे वृक्षः कम्पिल्लको यदा दृश्यः।
प्राच्यां हस्तत्रितये वहति शिरा दक्षिणा प्रथमम् ।।२१।।
मृन्नीलोत्पलवर्णा कापोता दृश्यते ततस्तस्मिन्।
हस्तेऽजगन्धको मत्स्यकः पयोऽल्पं च सक्षारम्।।२२।।
जलरहित देश में कम्पिल्ल वृक्ष ( कपिल = कवीला ) दिखाई दे तो उससे तीन
हाथ पूर्व दिशा में सवा तीन पुरुष नीचे दक्षिण शिरा बहती है। यहाँ पर खोदने के समय
पहले नील कमल के समान रंग वाली मिट्टी और उसके नीचे कबूतर के रंग की मिट्टी
दिखाई देती है तथा एक हाथ नीचे बकरे के समान गन्ध वाली मछली और उसके नीचे
खारा जल निकलता है।।२१-२२।।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmụ. Digitized by S3 Foundation USA