बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
DevanagariHindipublished728 पृष्ठ
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: 'श' then 'शा' with anusvara 'ङ्क': yes, "शशाङ्क"! Wait, why would it be "शाशाङ्क"? No, it's just "शशाङ्क"!
Line 18:
एकार्णवार्थनवशशिदहनखदस्रै २०३१९५४१ रविसुतस्य।
(एक=१, अर्णव=४, अर्थ=५, नव=९, शशि=१, दहन=३, ख=०, दस्र=२ -> २०३१९५४१)
Line 24:
तेन स्वराश्विखशरान् ५०२७ सङ्गुण्य खर्त्वग्नि३६०भिर्विभजेत्, लब्धमिष्टदेशयोरन्त-
Wait, "सङ्गुण्य" or "संगुण्य"?
It has 'ङ्गु': "सङ्गुण्य".
Line 26:
अक्षांशकुपरिधिबधान्मण्डलभागाप्तयोजनैर्विषुवति।
Wait, "भागाप्तयोजनैर्विषुवति" - look at भागाप्त:
भा गा प्प or भा गा प् त ? It is 'प्ता': भागाप्तयोजनैर्विषुवति।
Line 32:
भूभगणभ्रमणसंस्थानाद्यक्षावलम्बकाहर्व्यासचरदलकालराश्युदयच्छा-
Let's re-read carefully:
भूभगणभ