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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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६७२ बृहत्संहिता
२७४. बृहत् रूपे कति कलशाः?
(अ) अष्टोत्तरशतकलशाः (स) अष्टाविंशतिकलशाः
(ब) अष्टौ कलशाः (द) चतुर्विंशति कलशाः
२७५. मण्डलस्य कस्यां दिशि वेदी भवेत्?
(अ) मण्डलस्य पूर्वभागे (स) मण्डलस्य दक्षिणभागे
(ब) मण्डलस्योत्तरभागे (द) मण्डलस्य पश्चिमभागे
२७६. चतुर्षु कलशेषु कतिविधा औषधयः प्रक्षेपणीयाः?
(अ) षोडश (स) चतुर्दश
(ब) पञ्चदश (द) सप्तदश
२७७. अन्यानि मङ्गलद्रव्याणि कियन्ति?
(अ) त्रीणि (स) चत्वारि
(ब) पञ्च (द) सप्त
२७८. आसने प्रथमं किं स्तरणीयम् ?
(अ) वृद्धवृषभचर्म (स) मृगचर्म
(ब) युवावृषभचर्म (द) गजचर्म
२७९. गोचर्मोपरि किं भवेत् ?
(अ) युवावृषभचर्म (स) अजाचर्म
(ब) वत्सचर्म (द) सिंहचर्म
२८०. वृषभचर्मोपरि किं स्तरणीयम् ?
(अ) सिंहचर्म (स) गजचर्म
(ब) अजाचर्म (द) व्याघ्रचर्म
२८१. सिंहचर्मोपरि आसने किं स्यात् ?
(अ) मृगचर्म (स) गजचर्म
(ब) व्याघ्रचर्म (द) अजाचर्म
२८२. नृपस्यासने कतिविधानि चर्माणि?
(अ) चतुर्विधानि (स) त्रिविधानि
(ब) पञ्चविधानि (द) षड्विधानि
२८३. नृपासने चर्मोपरि किं स्तरणीयं भवति?
(अ) सुवर्णासनम् (स) ताम्रासनम्
(ब) रजतासनम् (द) लौहासनम्
२८४. राज्ञ आसनं कियद्विस्तृतं भवेत्?
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