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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

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पृष्ठ 598

५५६ बृहत्संहिता
गण सेनाओं के आगे होकर गमन करें तो विजय होती है।।२५।।
यस्य राज्ञो युयुत्सतो योद्धुमिच्छतो वाहिनीं सेनां मांसभुगामिषादः खगगणः पक्षि-
समूहः पृष्ठतः पश्चात् समुपयाति गच्छति तस्य महानतीव बलविद्रवः सेनापलायनं भवति।
अग्रगैषः पुरोगैर्विहङ्गमैः पाक्षिभिर्विजयो भवति।।२५।।
अथ गन्धर्वपुरलक्षणमाह—
भानोरुदये यदि वास्तमये गन्धर्वपुरप्रतिमा ध्वजिनी।
विम्बं निरुणद्धि तदा नृपतेः प्राप्तं समरं सभयं प्रवदेत् ॥२६॥
सूर्य के उदय या अस्त समय में पताकायुत गन्धर्व नगर की प्रतिमा सूर्यबिम्ब को
छादित करे तो राजा को भयङ्कर युद्ध की प्राप्ति होगी—ऐसा कहना चाहिये।।२६।।
भानोरादित्यस्योदये अस्तमये वा यदि गन्धर्वपुरप्रतिमा गन्धर्वनगरतुल्या ध्वजिनी
सेना यदा विम्बं मण्डलं निरुणद्धि छादयति, तदा नृपते राज्ञः समरं संग्रामं सभयं भय-
सहितं प्राप्तमायातमिति प्रवदेद् ब्रूयात्। तथा च गर्गः—
आदित्ये सरथा सेना सन्ध्याकाले यदा भवेत्।
प्रत्यासन्नं विजानीयाद् भूमिपस्य पराजयम्।। इति।।२६।।
अथ सन्ध्यालक्षणमाह—
शस्ता शान्तद्विजमृगघुष्टा सन्ध्या स्निग्धा मृदुपवना च।
पांशुध्वस्ता जनपदनाशं धत्ते रूक्षा रुधिरनिभा वा ॥२७॥
यदि सन्ध्याकाल में सूर्य के विरुद्ध दिशा में मुख करके पक्षीगण और जङ्गली पशु-
गण मधुर शब्द करें तथा निर्मल थोड़ी वायु चले तो शुभ होता है। यदि धूलियों से
व्याप्त, रूक्ष और लोहित वर्ण की सन्ध्या दिखाई दे तो देशों का नाश होता है।।२७।।
सन्ध्या शान्तैरनर्काभिमुखैर्मधुरस्वरैर्द्विजैः पक्षिभिर्मृगैरारण्यपशुभिश्च घुष्टा कृतशब्दा
शस्ता शुभदा, तथा स्निग्धा निर्मला, मृदुपवना अल्पवाता च शस्ता, पांशुध्वस्ता रजसा
कलुषीकृता, रूक्षा निःस्नेहा, रुधिरनिभा वा लोहितवर्णा जनपदानां नाशं संक्षयं धत्ते
ददाति।।२७।।
अथात्मनः पेशलत्वं प्रदर्शयितुमाह—
यद्विस्तरेण कथितं मुनिभिस्तदस्मिन्
सर्वं मया निगदितं पुनरुक्तवर्जम् ।
श्रुत्वाऽपि कोकिलरुतं बलिभुग्विरौति
यत्तत् स्वभावकृतमस्य पिकं न जेतुम् ॥२८॥
इति श्रीवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां मयूरचित्रकाध्यायः सप्तचत्वारिंशः ॥४७॥
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