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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

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५४६ बृहत्संहिता
गणितषिवर्जितो ग्रहगणितरहितोऽप्युत्पातान् बुद्ध्वा ज्ञात्वा विख्यातः कीर्तियुक्तो
नरेन्द्रवल्लभो नृपप्रियश्च भवति। एतद्रहस्यं परमार्थं मुनिवचनमृषिवाक्यमुक्तं कथितम्।
यज्ज्ञात्वा बुद्ध्वा नरः पुरुषस्त्रिकालदर्शी त्रिकालं पश्यति। अतीतानागतवर्तमानकालज्ञो
भवतीत्यर्थः। ।९८।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृता-
वुत्पाताध्यायः षट्चत्वारिंशः ॥४६॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA