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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

पृष्ठ 551, कुल 728 में से

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पृष्ठ 551

नीराजनाध्यायः ५०९
जिस राजा के हर्षित मनुष्य, घोड़े और हाथियों से युत, निर्मल खड्ग आदि से
प्रकाशमान, विकाररहित और शत्रु के लिये भयावह सेनागण हों, वह शीघ्र ही पृथ्वी को
जीत लेता है।।२८।।
इति 'विमला' हिन्दीटीकायां नीराजनाध्यायश्चतुश्चत्वारिंशः ॥४४॥
यस्य राज्ञ ईदृशं सैन्यं स राजा अचिराच्छीघ्रमेव गां भूमिं जयेत् स्वीकरोति। कीदृशम्?
सम्प्रहृष्टजनवाजिकुञ्जरम्, सम्प्रहृष्टाः प्रमुदिता नरा मनुष्याः। वाजिनोऽश्वाः, कुञ्जरा यत्र।
तथा निर्मलानां प्रहरणानां खड्गादीनां ये अंशवो रश्मयस्तैर्भासुरं देदीप्यमानम्। निर्विकारं
विकाररहितम्। निरुत्पातमित्यर्थः। अरिपक्षभीषणं शत्रुपक्षभयावहमिति।।२८।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ नीराजन-
विधिर्नाम चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः ॥४४॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA