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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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गन्धर्वनगरलक्षणाध्यायः ४५१
विरचितैः, अथवा पताकाध्वजैस्तोरणैश्चान्वितं संयुक्तं तदा तस्मिन् काले। नागानां गजानाम्।
मनुष्याणां पुरुषाणाम्। वाजिनामश्वानां च रणे संग्रामे। असृग् रुधिरम्। भूरि प्रभूतम्।
वसुन्धरा भूः पिबति। तथा च काश्यपः—
बहुवर्णं पताकाढ्यं गन्धर्वनगरं महत्।
दृष्टं प्रजाक्षयकरं संग्रामे लोमहर्षणम्।। इति।।५।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ गन्धर्वपुर-
लक्षणं नाम षट्त्रिंशोऽध्यायः ।।३६।।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA