बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगर्भलक्षणाध्यायः ३२९
यदि गर्भ शुक्ल पक्ष में हो तो कृष्ण पक्ष में, कृष्ण पक्ष में हो तो शुक्ल पक्ष म, दिन
में हो तो रात्रि में, रात्रि में हो तो दिन में, पूर्व सन्ध्या में हो तो पश्चिम सन्ध्या में और पश्चिम
सन्ध्या में हो तो पूर्व सन्ध्या में प्रसव होता है।। ८।।
सितपक्षभवाः शुक्लपक्षसम्भवा गर्भाः पुरतः पञ्चनवते दिनशते गते कृष्णपक्षे
प्रसवमायान्ति। एवं कृष्णपक्षोद्भवाः शुक्लपक्षे। द्युसम्भवा दिनसम्भवा गर्भा रात्रौ प्रसव-
मायान्ति। नक्तम्प्रभवा रात्रिसम्भवाश्चाहनि दिवसे प्रसवमायान्ति। सन्ध्याजाताः सन्ध्यायामेव
व्यत्ययाद्भवन्ति। प्राक्सन्ध्यासम्भूता अपरसन्ध्यायामपरसन्ध्यासम्भूताः प्राक्सन्ध्यायामिति।
तथा च गर्गः—
दिवा भवति यो गर्भो रात्रौ स इति पच्यते।
शुक्लपक्षे समुद्भूतः कृष्णे पक्षे च वर्षति।।
पौर्णमास्यामथोत्पन्नः सोऽमावास्यां प्रवर्षति।
अमावास्यां समुद्भूतः पूर्णमास्यां प्रवर्षति।।
पूर्वसन्ध्यासमुद्भूतः पश्चिमायां प्रवर्षति।
पश्चिमायां समुद्भूतः पूर्वसन्ध्यां प्रवर्षति।।
पूर्वाह्णे यः समुद्भूतः पश्चाद्रात्रौ प्रवर्षति।
निशायां पश्चिमे यश्च स पूर्वाह्णे प्रसूयते।।
दिनार्द्धे तु समुत्पन्नः स निशार्द्धे प्रसूयते।। इति।।८।।
अथ गर्भाणां विशेषलक्षणं कालनिर्देशं चाह—
मृगशीर्षाद्या गर्भा मन्दफलाः पौषशुक्लजाताश्च।
पौषस्य कृष्णपक्षेण निर्दिशेच्छावणस्य सितम् ॥९॥
माघसितोत्था गर्भाः श्रावणकृष्णे प्रसूतिमायान्ति ।
माघस्य कृष्णपक्षेण निर्दिशेद् भाद्रपदशुक्लम् ॥१०॥
फाल्गुनशुक्लसमुत्था भाद्रपदस्यासिते विनिर्देश्याः ।
तस्यैव कृष्णपक्षोद्भवास्तु ये तेऽश्वयुक्छुक्ले ॥११॥
चैत्रसितपक्षजाताः कृष्णोऽश्वयुजस्य वारिदा गर्भाः ।
चैत्रासितसम्भूताः कार्तिकशुक्लेऽभिवर्षन्ति ॥१२॥
मार्गशीर्ष शुक्ल और पौष शुक्ल में स्थित गर्भ मन्द फल ( अल्प वृष्टि ) देने वाला
होता है। यहाँ पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मास का ग्रहण करना चाहिये। जैसे चैत्र शुक्ल
प्रतिपदा से वैशाख कृष्ण अमान्त तक एक मास, वैशाख शुक्ल प्रतिपदा से ज्येष्ठ कृष्ण
अमान्त तक दूसरा मास इत्यादि। यदि पौष कृष्ण पक्ष में गर्भ हो तो श्रावण शुक्ल पक्ष में,
माघ शुक्ल में गर्भ हो तो श्रावण कृष्ण में, माघ कृष्ण में गर्भ हो तो भाद्र शुक्ल में, फाल्गुन