सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

पृष्ठ 367, कुल 728 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 367

ग्रहशृङ्गाटकाध्यायः ३२५
दुर्भिक्षरोगतस्करशस्त्रावृष्टिक्षुधं ग्रहाः कुर्युः।
आनलवीथ्यां ज्ञेया अजवीथ्यां नेत्रपरिहानिः।।
शस्त्रभयं मृगवीथ्यां जारद्रव्यां क्षुधं च रोगांश्च।
पशुनाशं गोवीथ्यामृषभाख्यायां च नृपपीडा।।
सुसुभिक्षमिरावत्यां गजवीथ्यां च ऋतूत्सवामोदाः।
अतिजलमोक्षं कुर्युर्नागाख्यायां च सर्वे तु।।
ग्रहोदये प्रवासे च सोमसूर्यग्रहे तथा।
विचार्य वीथीमार्गांश्च लोके ब्रूयाच्छुभाशुभम्।। इति।।१९।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ
ग्रहशृङ्गाटकंनाम विंशोऽध्यायः।।२०।।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA