बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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ग्रहशृङ्गाटकाध्यायः ३२५
दुर्भिक्षरोगतस्करशस्त्रावृष्टिक्षुधं ग्रहाः कुर्युः।
आनलवीथ्यां ज्ञेया अजवीथ्यां नेत्रपरिहानिः।।
शस्त्रभयं मृगवीथ्यां जारद्रव्यां क्षुधं च रोगांश्च।
पशुनाशं गोवीथ्यामृषभाख्यायां च नृपपीडा।।
सुसुभिक्षमिरावत्यां गजवीथ्यां च ऋतूत्सवामोदाः।
अतिजलमोक्षं कुर्युर्नागाख्यायां च सर्वे तु।।
ग्रहोदये प्रवासे च सोमसूर्यग्रहे तथा।
विचार्य वीथीमार्गांश्च लोके ब्रूयाच्छुभाशुभम्।। इति।।१९।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ
ग्रहशृङ्गाटकंनाम विंशोऽध्यायः।।२०।।
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