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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 728 में से

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पृष्ठ 161

राहुचाराध्यायः १२१
यदि धनु राशि में स्थित सूर्य या चन्द्र का ग्रहण हो तो मन्त्री, प्रधान मनुष्य, घोड़ा,
विदेह देश (मिथिला) में निवास करने वाले मनुष्य, बाहुयुद्ध करने वाले मनुष्य, पञ्जाब
देश में निवास करने वाले मनुष्य, वैद्य, व्यापारी, कठोर अस्त्र को चलाने वाले—इन सबों
का नाश करता है। यदि मकर राशि में स्थित सूर्य या चन्द्र का ग्रहण हो तो मछली,
मन्त्रियों का कुल, नीच कर्म करने वाले मनुष्य, मन्त्र और औषध को जानने वाले, वृद्ध,
शस्त्र से आजीविका चलाने वाले—इन सबों का नाश करता है।।४१।।
अमात्या मन्त्रिणः, वराः प्रधानाः, अथवाऽमात्यवराः प्रधानाः, वाजिनोऽश्वाः, विदेहा
जनाः, मल्ला बाहुयुद्धज्ञाः, पाञ्चाला जनाः, वैद्याः कायचिकित्सकाः, वणिजः क्रयविक्रयिणः,
विषमाः क्रूराः, आयुधज्ञा आयुधवेत्तार—एतान् धन्विनि हन्यात्।
हन्यान्मृगे त्विति। झषा मत्स्याः, मन्त्रिणश्चाणक्यविदः सचिवाः, कुलानि वंशाः
अथवा मन्त्रिणां सचिवानां कुलानि, नीचा अधमकर्मकराः—एतान् तथा मन्त्रौषधीषु च
कुशलान् मन्त्रेषु शैववैष्णवसौरैषु औषधीषु च कुशलान् शक्तान्, स्थविरान् वृद्धान्,
आयुधीयानायुधजीविन—एतान् मृगे मकरे हन्यात्।।४१।।
अथ कुम्भमीनयोराह—
कुम्भेऽन्तर्गिरिजान् सपश्चिमजनान् भारोद्वहांस्तस्करा-
नाभीरान् दरदाऽऽर्यसिंहपुरकान् हन्यात्तथा बर्बरान्।
मीने सागरकूलसागरजलद्रव्याणि वन्यान् जनान्
प्राज्ञान् वार्युपजीविनश्च भफलं कूर्मोपदेशाद्वदेत् ॥४२॥
यदि कुम्भ राशि में स्थित सूर्य या चन्द्र का ग्रहण हो तो पहाड़ी मनुष्य, पाश्चात्य देश
में रहने वाले मनुष्य, बोझा ढोने वाले, चोर, अहीर, दरद देश में रहने वाले, प्रधान मनुष्य,
सिंह नगर, बर्बर देश में रहने वाले मनुष्य—इन सबों का नाश करता है। यदि मीन राशि
में स्थित सूर्य या चन्द्र का ग्रहण हो तो समुद्र के तीर और जल में उत्पन्न हुये द्रव्य, जंगली
मनुष्य, बुद्धिमान, जल के विक्रय से जीवन-यात्रा चलाने वाले मनुष्य—इन सबों का नाश
करता है। नक्षत्र-फल कूर्म-विभाग के द्वारा कहना चाहिये, जैसे कि जिस नक्षत्र में सूर्य
या चन्द्र का ग्रहण हो, वह नक्षत्र कूर्म-विभाग से जिस देश में पड़े, उस देश में स्थित
मनुष्यों को पीड़ा होती है।।४२।।
अन्तर्मध्ये गिरौ पर्वते जाता अन्तर्गिरिजास्तान् पर्वतमध्यजातान् जनान् सपश्चिमजनान्
पश्चिमदिग्वासिभिर्जनैः सह। केचिदन्तर्गिरिजान् स पश्चिमानिति पठन्ति। गिरेरन्तरे जातान्
जनान् पश्चिमजनान् पश्चिमदिग्वासिनः। प्राक्पाठोऽत्र शोभनः। भारोद्वहान् भारवाहिनः, तस्क-
रान् चौरान्, आभीरान् जनान्, दरदान् जनानेव, आर्यान् प्रधानजनान्, सिंहपुरकान्, बर्बरान्
तथा तेनैव प्रकारेण एतान् सर्वान् कुम्भे हन्यात्।
सागरकूलं समुद्रतटम्। सागरजलद्रव्याणि समुद्रोत्पन्नानि द्रव्याणि रत्नादीनि। वन्यान्
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