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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 90, कुल 800 में से

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पृष्ठ 90

९२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
अथ परिधिफलम्
विद्वान् सत्यरतः शान्तो धनवान्पुत्रवाञ्छुचिः।
दाता च परिधौ मूर्त्तौ जायते गुरुवत्सलः ।।१।।
यदि परिधि लग्न में हो तो जातक विद्वान्, सत्य बोलने वाला,
शान्तचित्त, धनवान्, पुत्रवान्, पवित्र, दाता और गुरुभक्त होता है।।१।।
ईश्वरो रूपवान् भोगी सुखी धर्मपरायणः।
धनस्थे परिधौ प्राप्ते प्रभुर्भवति मानवः ।।२।।
दूसरे भाव में हो तो समर्थ, रूपवान्, भोगी, सुखी, धर्मपरायण और
समर्थ होता है।।२।।
स्त्रीवल्लभः सुरूपाङ्गो देवस्वजनसङ्गतः।
तृतीये परिधौ भृत्यो गुरुभक्तिसमन्वितः ।।३।।
तीसरे भाव में हो तो स्त्रीप्रिय, सुन्दर रूप, धन से पूर्ण, देवता और
आपस के लोगों के अनुकूल, नौकर और गुरुभक्त होता है।।३।।
परिधौ सुखभावस्थे विस्मितं त्वरिमङ्गलम्।
अक्रूरं त्वथ सम्पूर्ण कुरुते गीतकोविदः ।।४।।
चौथे भाव में हो तो विस्मयालु, शत्रु का मंगल करने वाला, सरल और
गीतज्ञ होता है।।४।।
लक्ष्मीवान् शीलवान् कान्तः प्रियवान् धर्मवत्सलः ।।५।।
पञ्चमे परिधौ जाते स्त्रीणां भवति वल्लभः ।।५।।
पाँचवें भाव में हो तो लक्ष्मीवान्, शीलवान्, सुन्दर, धार्मिक और स्त्रियों
का प्रिय होता है।।५।।
व्यक्तोऽर्थपुत्रवान् भोगी सर्वसत्त्वहिते रतः।
परिधौ रिपुभावस्थे शत्रुहा जायते नरः ।।६।।
छठे भाव में हो तो प्रसिद्ध धनी, पुत्रवान्, भोगी, सभी का हित करने
वाला, शत्रुयुक्त किन्तु शत्रु का नाश करने वाला होता है।।६।।
स्वल्पापत्यसुखैर्हीनो मन्दप्रज्ञः सुनिष्ठुरः।
परिधौ द्यूनभावस्थे स्त्रीणां व्याधिश्च जायते ।।७।।
यदि परिधि सातवें भाव में हो तो थोड़े संतान सुख से हीन, मंदबुद्धि
एवं निष्ठुर और उसकी स्त्री रोगी होती है।।७।।