बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७४२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
चन्द्रे प्रभुतया भौमे ग्रामण्येन बुधे सति ।
श्रौतया विद्यया वाऽर्थलिपिलेखनकर्मणा ॥७८॥
चन्द्रमा बली हो तो प्रभुता, भौम बली हो तो ग्राम में प्रभुतायुक्त, बुध बली
हो तो श्रौतकर्म, विद्या लेखन कला से द्रव्ययुक्त हो॥७८॥
जनैर्धनैरमात्येषु बुद्ध्या च बलवान्गुरौ ।
यद्वा स्वदेशराजस्तु कार्येणैवंवली मतः ॥७९॥
गुरु बली हो तो जन-धन-मंत्री और बुद्धि से बली हो या स्वदेश में शासन
कार्य में बली हो॥७९॥
शुक्रे स्वदेशमुख्यो वा त्वाधिपत्येन योषिताम् ।
मंदे भृतकदासानां मुख्यः स्याद्बलवानपि ॥८०॥
शुक्र बली हों तो स्वदेश में मुख्य, स्त्रियों के आधिपत्य से सुखी, शनि बली
हो तो नौकर दासों का प्रधान होता है। स्थानबल से रहित ग्रह हो तो दास होता
है॥८०॥
उक्तैस्तु पीडितः प्रेष्यः स्थानवीर्योनितेषु तु ।
समन्यूनाधिकाद्वीर्याद्दृष्टोत्कर्षात्फलं वदेत् ॥८१॥
इसी समन्यून अधिक बल से युक्तग्रह के फल का विचार करना
चाहिये॥८१॥
दिग्वलयुक्त ग्रहाणां फलम् -
दिग्वलेनाधिके सूर्ये वाणिज्येन धनायतिः ।
यशश्च धनवृद्धिश्च चन्द्रे तु राजसेवया ॥८२॥
सूर्य दिग्वल से पूर्ण हो तो रोजगार से धन की प्राप्ति, यश और धन की
वृद्धि होती है। चन्द्रमा बली हो तो राजसेवा से धन का लाभ॥८२॥
भौमे तु सेवया ख्यातिर्वेदाभ्यासेन सर्वदा ।
बुधे धनायतिः कृष्या यशः स्याद्बुद्धिमत्तया ॥८३॥
भौम दिग्वल से युक्त हो तो सेवा से वेदाभ्यास से प्रसिद्धि होती है। बुध
बली होतो बुद्धिमंता से यश और कृषि से धन का लाभ होता है॥८३॥
गुरौ धनायतिस्तैन वीर्येण धन शुभ्रता ।
राजकार्येण शुक्रे च वदान्यत्वेन वा यशः ॥८४॥