बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 728, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें७१६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
काल्यंशवद्यर्धहोरांशभोगकालः प्रकीर्त्तितः ।
प्रमाणराशयश्चैते भागहारा कलात्मकाः ।।७२।।
तत्तद्देशकला इच्छाराशयो गुणराशयः ।
कटुको मधुरतिक्तः कषायो लवणाम्लकौ ।।७३।।
कलांश में उत्पन्न हुये का कटुक, मीठा, तीता, कषैला, नमक, अम्ल।।७२-
७३।।
कालांशेक्रमतो गण्याः षष्ठ्यंशेव्युत्क्रमात्स्मृताः ।
त्रिंशांशेतु कषायादिःकालहोरांशके पुनः ।।७४।।
क्रम से गणना करने से जो रस आवे वह उस वर्ष में उसे प्रिय होता है।
षष्ठ्यंश में उसे अम्ल से कटु पर्यन्त इस क्रम से, त्रिंशांश में कषाय से तिक्त
पर्यन्त।।७४।।
तिक्तादि द्वादशांशेषु मधुरादि नवांशके ।
अम्लादिमुनिर्भागे तु द्रेष्काणे मधुरादितः ।।७५।।
द्वादशांश में मधुरादि क्रम, नवांश में अम्लादि क्रम, सप्तांश, अर्ध होरा और
द्रेष्काण में मधुरादि क्रम से गिनना चाहिये।।७५।।
षष्ठ्यंशोत्पत्तौफलम् -
अर्धहोरांशके तद्वज्जातस्यैवं प्रजायते ।
वेदाष्टदशभैरमैः प्रषष्ठ्यंशे च भास्करे ।।७६।।
यदि कन्या के जन्म समय में सूर्य ४।८।१०।२७।३ संख्यक षष्ठ्यंश में
हो तो वह कन्या बंध्या होती हैं।।७६।।
त्रिषट्न्वत्रिर्वाकार्ध्विजिनदंतसुराः क्रमात् ।
नवदिग्भैर्जिनाकैश्र्च सूर्यैस्तांस्त्रिपंचभिः ।।७७।।
तथा ३।६।९।३।०।१२।४।२४।३२।३३ इन अंकों को क्रम से
९।१०।२७।२४।१२।१२।४९।३।५।५० से गुण ने जो प्राप्त हो उतने संख्या
के षष्ठ्यंश में सूर्य हो तो कन्या पूज्या (पूजनीया) होती हैं।।७७।।
मृतपुत्र-कन्यायोग-
पंचाशद्भिःक्रमाद्गुण्या वंध्यावंध्या प्रकीर्त्तिताः ।
त्रिवेदाद्यंकविश्वेंद्र नखच्छदोजिनायमाः ।।७८।।