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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 721, कुल 800 में से

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पृष्ठ 721

अथ चतुर्दशोऽध्यायः । ७०९
इसी प्रकार धनु से एवं मेष से भी ऐसे ही १२ ग्रहों का न्यास कर नक्षत्र
का ज्ञान करना।।१५।।
नित्योदयघटीप्रमाणम् -
अर्कादि धूमपर्यन्ताः क्रमात्स्युर्धटिकांशके ।
सत्र्यंशा घटिकास्तिस्रो मेषादिनिमिषयोर्द्विज ।।१६।।
चतस्रः कुंभवृषयोस्तथा मकर युग्मयोः ।
पंच सत्र्यंशास्ताः कर्किधनुषोः स्मृताः ।।१७।।
सिंहवृश्चिकयोः षट् च अंशोनाःसप्तशेषयोः ।
नित्यं मानमिदं प्रोक्तं मेषादुदयराशिजम् ।।१८।।
हे मैत्रेय मेषादि राशियों के नित्योदय घटीमान कहता हूँ। शेष चक्र से स्पष्ट
हैं।।१६-१८।।
मेषादि राशीनां उदय घटी मान।

मे.बृ.मि.क.सिं.कं.तु.बृ.ध.म.कुं.मी.राशि
३४४५६६६६५४४३घ.
२००४०२००४०४००२०४००२०प.

प्रकारान्तरेण राशीनांमानानि-
ख्याक्रान्तातथा प्रोक्ता एकद्वित्रिचतुर्घटी ।
मानानि मेषतः सिंहाच्चापादर्कौदयात्ततः ।।१९।।
उदय लग्न से मेष से चार सिंह से चार और धन से चार लग्नों का क्रम से
एक, दो, तीन और ४ घटी प्रकारांतर से मान होता है। जो लग्न हो उसके मान
में दशवर्गाधिपों का विभाजन करना चाहिये।।१९।।
दशवर्गाधिपाश्चिन्त्याः प्रोक्ताश्चेन्दुनवांशकाः ।
अन्यत्र कीर्त्तिताः प्रश्ने नष्टद्रव्यस्य निश्चये ।।२०।।
इसका प्रयोजन-नष्टद्रव्य के निश्चय करने में तथा प्रश्न के विचार में चन्द्रनवांश
को भी देखना चाहिये।।२०।।
दशवर्गानांफलम् -
श्रीमान् रिक्तश्च मूर्खश्च कुशलोवंचनः पटुः ।
स्त्रीशक्तो वेदविद्वीरो मंदाग्निस्तीब्रशेषणः ।।२१।।