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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 720, कुल 800 में से

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पृष्ठ 720

७०८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
षष्ठिघट्यात्मकमुहूर्त्ताः-
नामानि च मुहूर्त्तानां विनाडीद्वयरूपिणाम् ।
आवृत्त्याषष्ठिताः प्रोक्ताः कालांशा नाडिरुपिणः ॥१९०॥
पूर्व में दिन रात्रि के २ घटी वाले मुहूर्त्त को दूना कर देने से एक घटी के
६० मुहूर्त्त होते हैं इसे कालांश कहते हैं॥१९०॥
कालांशराशिचक्रमुहूर्त्त-
नक्षत्रसंज्ञया प्रोक्ताः षष्ठ्यावृत्त्याकलांशकाः ।
मेषोयमो वृषः कुंभो झषोजूकश्च कर्कटः ॥१९१॥
पूर्व में कहे हुये दिन और रात्रि के ३२ मुहूर्त्त को दूना कर देने से नक्षत्र
कलांश मुहूर्त्त होता है। सूर्योदय से पाँच-पाँच घटी का मेषादि राशियों का कालांश
होता है। वे मेष, मिथुन, वृष, कुंभ, मीन, तुला, कर्क॥१९१॥
सिंहोऽथ वृश्चिकश्चाथो मृगः कन्या क्रमाद्भवेत् ।
राशि चक्र कलांशे तु क्रमादेवं प्रकीर्त्तिताः ॥१९२॥
सिंह, वृश्चिक, धन, मकर, कन्या ये राशि कालांशक हैं॥१९२॥
नित्योदयस्यक्रमः-
मेषो गोर्यम कर्की लेयकन्यातुलालयः ।
धनुर्मृगघटोमीनमुदयाद्घटिकासु च ॥१९३॥
ऊपर कहे हुये कालांश के नित्योदय का क्रम कह रहे हैं! मेष, वृष, मिथुन,
कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धन, मकर, कुम्भ, मीन ये राशियाँ उदयकालीन
लग्न से क्रम से घटी तुल्य अर्थात् मीन, मेष, चार-चार घटी और वृष कुंभ साढ़े
चार घटी तथा मकर और मिथुन पाँच-पाँच घटी शेष राशियाँ साढ़े पाँच २ घटी
में उदय होती हैं॥१९३॥
सिंहान्मेषाच्च चापाच्च नक्षत्रक्रम ईरितः ।
चन्द्रज्ञ शुक्रधूमार्कपरिवेषार्ककार्मुकाः ॥१९४॥
नक्षत्र लेने का प्रकार— सिंहादि नक्षत्र से १, धनुरादि से २, मेष राशि से
यह तीन प्रकार हैं! अर्थात् जन्मलग्न सिंहादि है तो सिंह पर चन्द्रमा, कन्या पर बुध,
तुला पर शुक्र, वृश्चिक पर धूम इत्यादि क्रम से कर्क पर केतु को लिखना॥१९४॥
गुरुः पातः शनिः केतुर्ग्रहाः क्षुद्रदिश क्रमात् ।
चक्र लिप्तांशके चैवं केत्वादिस्तारकांशके ॥१९५॥