बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 680, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें६६८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
वेदाश्विभिर्बंधुहीनो दद्याद्गोदानकं दश ।
सर्वरोगादि नाशार्थं जपहोमादि कारयेत् ॥७४॥
२४ रेखा हो तो बंधु हीनता का भय होता है इसकी शान्ति के लिये दश
गोदान करे २५ रेखा हो तो सभी रोग आदि के नाशार्थ जप होम करावै ।।७४।।
ऋतुपक्षैर्बुद्धिहीनः पूज्या वागीश्वरी तथा ।
धनक्षयः स्यान्नक्षत्रैः श्रीसूक्तं तत्र संजपेत् ।।७५।।
२६ रेखा हो तो बुद्धि हीनता होती है इसकी शान्ति के लिये बागीश्वरी देवी
का पूजन करना चाहिये। २७ रेखा हो तो धन की हानि होती है इसकी शान्ति
के लिये श्रीसूक्त का जप करावै ।।७५।।
वसुपक्षयुते मासे न लाभो हानिखेचरैः ।
सूर्यहोमश्च कर्त्तव्यः विधिना शुभकांक्षिभिः ।।७६।।
२८ रेखा हो तो ग्रहों द्वारा हानि होती है। सूर्य के मंत्र से हवन कराना
चाहिये ।।७६।।
एकोनत्रिशता चापि चिंता व्याकुलितो भवेत् ।
घृतवस्त्रसुवर्णानि तत्र दद्याद्विचक्षणः ।।७७।।
२९ रेखा हो तो चिंता से व्याकुलता होती है इसकी शान्ति के लिये घी वस्त्र
सुवर्ण का दान करना चाहिये।।७७।।
त्रिशता धनधान्याप्तिरिति जातकनिर्णयः ।
भूवह्निभिर्महोद्योगः पुत्रसंपद्गुणाग्निभिः ।।७८।।
३० रेखा हो तो धन धान्य का लाभ होता है। ३१ रेखा हो तो बड़े उद्योग
का आरम्भ और ३३ रेखा में पुत्र संपत्ति का लाभ।।७८।।
सहेमवस्त्रलाभश्च चतुस्त्रिंशत्समन्विते ।
पंचरामैर्भवेद्धीमान्षट्त्रिंशत्सुतवित्तदा ।।७९।।
और ३४ रेखा में सुवर्ण वस्त्र का लाभ रेखा में बुद्धि की प्राचुर्यता, ३६
रेखामें पुत्र और धन का लाभ होता है।।७९।।
सप्तत्रिंशद्धनस्याप्तिरष्टत्रिंशत्सुखार्थदा ।
द्रव्यरत्नाप्तिरेकोनचत्वारिंशद्भिर्प्रवर्धते ।।८०।।