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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 608, कुल 800 में से

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पृष्ठ 608

६०६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
अथ भौमभावस्थानप्रदान्ग्रहानाह-
लग्नमन्दकुजा भौमो होराज्ञेन्दुदिनाधिपाः ।
मन्दारौ झरवी ज्ञेन्दुजवार्कतनुभार्गवाः ॥५६॥
भौम से १ भाव में लग्न, शनि, भौम ये तीन रेखाप्रद हैं। २ भाव में भौम,
३ भाव में लग्न, बुध, चंद्र, सूर्य ये ४ रेखाप्रद हैं। ४ भाव में शनि, भौम। ५
भाव में बुध, सूर्य। ६ भाव में बुध, चंद्र, गुरु, सूर्य, लग्न, शुक्र ये ६ ग्रह ॥५६॥
मन्दारौ तौ सितश्चार्किकुजार्कार्यार्कि लग्नकाः ।
सर्वे गुरुसितौ स्थानं भौमस्यैवंविदुर्बुधाः ॥५७॥
७ भाव में शनि, भौम, ८ भाव में शनि, भौम, शुक्र ये ३ रेखाप्रद हैं।
९ भाव में शनि, १० भाव में भौम, सूर्य, गुरु, शनि, लग्न ११ भाव में सूर्य,
चंद्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, लग्न और १२ भाव में गुरु, शुक्र ये २ ग्रह