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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 604, कुल 800 में से

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पृष्ठ 604

६०४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
८ भाव में सूर्य, चंद्र, भौम, गुरु, शनि, लग्न ये ६ ग्रह करणप्रद हैं। ९
भाव में सूर्य, चंद्र, भौम, बुध, शनि, लग्न ये करणप्रद हैं। १० भाव में और ११
भाव में शुक्र, करणप्रद हैं। १२ भाव में भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, लग्न ये
६ ग्रह करणप्रद हैं॥४९॥
लग्नस्यैवं तु संप्रोक्तं करणं द्विजपुंगव ।
हे ब्राह्मण श्रेष्ठ! इस प्रकार से लग्न के करण (बिन्दु) संख्या को कहा।
उक्तान्ये स्थानदातारं इति स्थानं विदुर्बुधाः ।
अथ स्थानग्रहान्वक्ष्ये सुखवीधाय सूरिणाम् ।।५०।।
पहले सूर्यादि ग्रहों के बिन्दु देनेवाले ग्रहों को कहकर उससे भिन्न स्थान (रेखा)
देनेवालों को कहते हैं।।५०।।
अथ रवि भावस्थानप्रदानग्रहान् आह-
स्वायुस्तनुषु मंदारसूर्यजीवबुधौ सुते ।
विक्रमे ज्ञेन्दुलग्नानि लग्नाकार्किकुजा गृहे ।।५१।।
सूर्य से २।७, १ भाव में शनि, भौम, सूर्य ये तीन रेखाप्रद ग्रह हैं। ५ भाव
में गुरु, बुध ये दो ग्रह, २ भाव में बुध, चन्द्र और लग्न ये ३ ग्रह। ४ भाव में
लग्न सूर्य, शनि, भौम ये ४ ग्रह।।५१।।
खे ज्ञेन्दुरवयश्चाये सर्वे शुक्रं विना व्यये ।
लग्नशुक्रवुधाः शत्रौ ते च जीवसुधाकरौ ।।५२।।
१० भाव में लग्न, सूर्य, शनि, भौम, बुध और चन्द्र ये ६ ग्रह। ११ भाव
में शुक्र से भिन्न (सूर्य, चंद्र, भौम, बुध, गुरु, शनि, लग्न ये ७ ग्रह। १२ भाव
में लग्न, शुक्र, बुध ये ३ ग्रह। ६ भाव में लग्न, शुक्र, बुध, गुरु, चंद्र ये ५
ग्रह।।५२।।


सूर्याष्टकवर्गः। रे. सं. ४८

सू.चंमं.बु.बृ.शु.श.ल.
१३१३५६११
२६२४६७२४
४१०४६९१२४६
७११७९११७१०
८८१०८११
९९११९१२
१०१०१२१०
११११११

सूर्याष्टकवर्ग चक्र (कुण्डली)

  • प्रथम भाव (१): ।।। ४ सू.
  • द्वितीय भाव (२): ।।। शु ३, च
  • तृतीय भाव (३): ।।।।।। २
  • चतुर्थ भाव (४): ।।। २
  • पंचम भाव (५): ।। ११ मं.
  • षष्ठ भाव (६): ।।।।। ९
  • सप्तम भाव (७): ।।।। १० ल
  • अष्टम भाव (८): ।।।।।।। (७)
  • नवम भाव (९): ।।।। ७
  • दशम भाव (१०): ।। ६
  • एकादश भाव (११): ।।।। बु ५ / वृ
  • द्वादश भाव (१२): ।।।।। २