बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६०२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
अथ शनेःकरणसंख्यां-करणप्रद ग्रहांश्चाह-
शुक्रार्केन्द्वार्किलग्ग्यार्याः शत्रौ शून्यं भवेव्यये ।
होरार्किबुधशुक्रार्यास्तन्वारङ्गेन्दिनाश्च खे ।।४१।।
६ भाव में शुक्र, सूर्य, चन्द्र, शनि, लग्न और गुरु ये ६ करणप्रद ग्रह हैं।
११ भाव में कोई नहीं है। १२ भाव में लग्न, शनि, बुध, शुक्र, गुरु ये ५ करणप्रद
ग्रह हैं। १० भाव में लग्न, भौम, बुध, चंद्र, सूर्य ये ५ करणप्रद ग्रह हैं।।४१।।
स्वस्त्रीधर्मेषु सप्ताङ्गं मृतिहोरगृहेषु च ।
आज्ञाभ्रातृव्यये वेदा रूपं शत्रौ सुते शराः ।।४२।।
शनि से २।७।९ भाव में ७ करण, ८ लग्न, ४ भाव में ६ करण,
१०।३।१२ भाव में ४ करण, ६ भाव में १ करण, ५ भाव में ५ करण।।४२।।
आये शून्यं शनेरेवं करणं प्रोच्यते बुधैः ।
गृहे तनौ च लग्नाकौ स्वस्त्रियोश्च रविं बिना ।।४३।।
११ भाव में शून्य करण होता है। शनि से ४।१ भाव में लग्न, सूर्य
को छोड़कर सभी ग्रह करणप्रद होते हैं। २।७ भाव में रवि को छोड़कर शेष
७ ग्रह।।४।।
हित्वा धर्मे बुधं माने लग्नाररविचन्द्रजान् ।
ततो भ्रातरि जीवार्कबुध शुक्राः क्षते रविः ।।४४।।
९ भाव में बुध के बिना ७ ग्रह। १० भाव में लग्न, भौम, रवि, चंद्र के
बिना (चंद्र, गुरु, शुक्र, शनि) चार ग्रह, ३ भाव में गुरु, सूर्य, बुध, शुक्र ये चार ग्रह
६ भाव में केवल सूर्य।।४४।।
व्यये लग्नेन्दुमंदार्काः सितार्केन्दुज्ञलग्रकाः ।
सुते मृतौ बुधाकौ च हित्वाऽऽये खं शनेर्विंदः।।४५।।
१२ भाव में लग्न, चंद्र, शनि, सूर्य ये चार ग्रह। ५ भाव में शुक्र, सूर्य,
चंद्र, बुध, लग्न ये चार ग्रह, ८ भाव में चन्द्र, सूर्य ये २ ग्रह, ११ भाव में कोई
नहीं करणप्रद हैं। यह शनि की बिन्दु संख्या कही गई है।।४५।।