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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 60

६२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
द्विस्वभाव के क्रम से ब्रह्मा, शंकर, विष्णु; शंकर, विष्णु, ब्रह्मा; विष्णु, ब्रह्मा,
शंकर ये स्वामी होते हैं॥३०॥
उदाहरण— लग्न ९।१५।२२।३७ है। ४० कला का एक भाग होता है,
अतः २४वाँ मीन राशि अर्थात् गुरु का अक्षवेदांश हुआ और विष्णु स्वामी
हुए।
अक्षवेदांशचक्रम्—

ब्रह्माशं.वि.ब्र.शं.वि.ब्र.शं.वि.ब्र.शं.विष्णु
शंकरवि.ब्र.शं.वि.ब्र.शं.वि.ब्र.शं.वि.ब्रह्मा
विष्णुब्र.शं.वि.ब्र.शं.वि.ब्र.शं.वि.ब्र.शंकर
सं.मे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.अं.क.
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