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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 57

षोडशवर्गाध्यायः ५९

सं.स्वामीमे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.अ.क.वि.
१०पितर७१०१४७१०१४७१०१४११६४०
११यम८११२५८११२५८११२५१२१३२०
१२अर्यमा९१२३६९१२३६९१२३६१३२००
१३अर्क१०१४७१०१४७१०१४७१४२६४०
१४त्वष्टा११२५८११२५८११२५८१५३३२०
१५वायु१२३६९१२३६९१२३६९१६४००
१६शक्राग्नि१४७१०१४७१०१४७१०१७४६२०
१७मित्र२५८११२५८११२५८१११८५३२०
१८वासव३६९१२३६९१२३६९१२२०००
१९निर्ऋति४७१०१४७१०१४७१०१२१६४०
२०उदक५८११२५८११२५८११२२२१३२०
२१विश्वेदे६९१२३६९१२३६९१२३२३२००
२२गोविंद७१०१४७१०१४७१०१४२४२६४०
२३वसु८११२५८११२५८११२५२५३३२०
२४वरुण९१२३६९१२३६९१२३६२६४००
२५अजपात्१०१४७१०१४७१०१४७२७४६४०
२६अहिर्बुध्न्य११२५८११२५८११२५८२८५३२०
२७पूषा१२३६९१२३६९१२३६९३०००
अथ त्रिंशांशमाह—
त्रिंशांशेशाश्च विषमे कुजार्कीज्यज्ञभार्गवाः।
पञ्चपञ्चाष्टसप्ताक्षभागा व्यत्ययतः समे॥२६॥
वहिनः समीरशक्रौ च धनदो जलदस्तथा।
विषमेषु क्रमाज्ज्ञेया समराशौ विपर्ययम्॥२७॥
विषम राशि में भौम, शनि, गुरु, बुध और शुक्र का क्रम से ५, ५, ८, ७, ५
अंश और सम राशि में शुक्र, बुध, गुरु, शनि और भौम का क्रम से
५, ७, ८, ५, ५ अंश त्रिंशांश होता है। विषम राशि में क्रम से वहिन, वायु, इन्द्र,
धनद और जलद तथा सम राशि में जलद, धनद, इन्द्र, वायु और अग्नि
अधिपति होते हैं।। २६-२७ ।।
उदाहरण— लग्न ९।१५।२२।३७ है। लग्न सम है अतः गुरु का
त्रिंशांश हुआ और इन्द्र स्वामी हुए।