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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 511, कुल 800 में से

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पृष्ठ 511

अथान्तर्दशाफलविचाराध्यायः ॥ ५१३
लग्नेश से युक्त भौम के अन्तर में पहले सुख, धन का आगम, राजा से प्रीति,
सुख, वाहन, वस्त्र, आभूषण का लाभ होता है॥५३॥
सेनाधिपत्यं नृपप्रीतिः कृषिगोधान्यसंग्रहः ।
नूतनस्थाननिर्माणं भ्रातृवर्गेष्टसौख्यकृत् ॥५४॥
सेनाधिपति का अधिकार, राजा से प्रेम, कृषि गौ धान्य का संग्रह, नवीन
स्थान का निर्माण, भाइयों से अभीष्ट सुख का लाभ होता है॥५४॥
नीचे चास्तंगते भौमे षष्ठाष्टव्ययराशिगे ।
पापद्दष्टियुते वापि धनहानिर्भविष्यति ॥५५॥
यदि भौम अपने नीच में वा अस्त हो वा ६।८।१२ भाव में हो तो धन
की हानि होती है॥५५॥
चौराहिब्रणशस्त्रादिग्रंथिरोगादिपीडनम् ।
भ्रातृपुत्रादिपीडा च दायादजनविग्रहम् ॥५६॥
चोर-सर्प-फोड़ा, हथियार, ग्रंथि रोगादि से पीड़ा होती है, भाई पुत्र को पीड़ा,
दायादों से विग्रह॥५६॥
चतुष्पाज्जीवहानिश्च कुत्सितान्नस्यभोजनम् ।
विदेशगमनं चैव नानामार्गे धनव्ययः ॥५७॥
चौपाये जानवर की हानि, खराब अन्न का भोजन, विदेश यात्रा, अनेक प्रकार
से धन व्यय होता है॥५७॥
अष्टमद्यूननाथे तु द्वितीयस्थेऽथवायदि ।
अपमृत्युभयं चैव नानाकष्टपराभवम् ॥५८॥
आठवें वा दूसरे भाव का स्वामी हो तो अनेक कष्ट और पराभव होता
है॥५८॥
तद्दोषपरिहारार्थं शान्तिहोमं च कारयेत् ।
अनड्वाहं प्रकुर्वीत सर्वारिष्ट प्रशान्तये ॥५९॥
इस दोष के शान्त्यर्थ शान्ति और हवन करना चाहिये। और सभी अरिष्टों
के शान्त्यर्थ बैल का दान करना चाहिये॥५९॥
अथशनिदशायांराह्वन्तर्दशाफलम् –
मन्दस्यान्तर्भते राहौ कलहश्च मनोव्यथा ।
देहपीडा मनस्तापः पुत्रद्वेषो मनोरूजः ॥६०॥