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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 497, कुल 800 में से

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पृष्ठ 497

अथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ४९९
दशेश से ६।८।१२ भाव में पापग्रह से युत हो तो राजा के कोप से धन
की हानि, बंधुओं को कष्ट।।३६।।
बलहानिः पितृद्वेषो भ्रातृद्वेषो मनोरुजः ।
द्वितीयद्यूननाथे तु देहबाधा भविष्यति ।।३७।।
पिता से द्वेष, भाई से द्वेष, मानसिक कष्ट होता है। २ वा ७ भाव का स्वामी
हो तो देहबाधा होती है।।३७।।
छागदानं प्रकुर्वीत मृत्युंजय जपं चरेत् ।
सर्वदोषोपशमनीं शान्तिं कुर्याद्विधानतः ।।३८।।
बकरी का दान और मृत्युंजय का जप कराना चाहिये। सभी दोषों के शमन
करने वाली शान्ति को विधानपूर्वक करना चाहिये।।३८।।
अथगुरुदशायांशुक्रान्तर्दशाफलम्-
जीवस्यानागते शुक्रे भाग्यकेन्द्रेशसंयुतं ।।३९।।
लाभे वा सुतराशिस्थे स्वक्षेत्रेशुभसंयुते ।
गुरु की दशा में भाग्येश केन्द्रेश से युत वा लाभ स्थान वा पांचवें स्थान
में अपनी राशि में शुभग्रह से युत शुक्र के अन्तर में ।।३९।।
महाराजप्रसादेन देशाधिक्यं महत्सुखम् ।।४०।।
महाराजा की प्रसन्नता से देश का लाभ और सुख।।४०।।
नीलाम्बराणि शस्त्राणिलाभश्चैव भविष्यति ।
पूर्वस्यां दिशि आश्रित्य प्रयाणं धनलाभदम् ।।४१।।
नीले रंग के वस्त्र, शस्त्र, का लाभ, पूर्व दिशा की यात्रा से धन का लाभ
होता है।।४१।।
कल्याणं च महाभीतिः पितृमातृ सुखावहा ।
देवतागुरुभक्तिंश्च अन्नदानं महत्तथा ।।४२।।
कल्याण, महाभय, पिता-माता को सुख, देवता-गुरु में भक्ति और बड़े पैमाने
पर अन्न का दान।।४२।।
तडागगोपुरादीनि कृत्वां पुण्यानि भूरिशः ।
षष्ठाष्टमव्यये नीचे दायेशाद्वा तथैव च ।।४३।।
ताडाग-गोपुर आदि पुण्यदायक अनेक कार्य होते हैं। यदि शुक्र लग्न से वा
दशेश से ६।८।१२ स्थान में वा नीच में हो तो।।४३।।