बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाफलाध्यायः । ४३९
जंतोः फलं खलु करोति
यदारिनीचस्थानस्थितोऽशुभफलं विबलो विशेषात् ।।८०।।
यदि भावेश बली हो अपने गृह वा उच्च वा मूलत्रिकोण में वा शुभग्रह के
वर्ग में हो तो पूर्ण फल देता है। यदि शत्रुगृह, नीचराशि में हो तो अशुभ फल
करता है।।८०।।
आहुः शुभाशुभफलं नृणां कालविदो जनाः ।
एतद्वलं विनिर्णीतमायुषां निश्चयो नृणाम् ।।८१।।
शुभग्रह यदि शुभद है तो शुभ फल देता है इस प्रकार दशा के वश आयु
का निर्णय करना चाहिये।।८१।।
पंचमेशयुतस्यापि धर्मेशस्य दशातुया ।
अतीव शुभदा प्रोक्ता कालविद्भिर्मुनीश्वरैः ।।८२।।
स पंचमेशस्य तपोधिपस्य दशा भवेद्राज्यसुखार्थलाभदा ।
तथैव मानाधिपसंयुतस्य सुतेश्वरस्यापि दशाशुभास्यात् ।।८३।।
पंचमेश से युक्त धर्मेश की दशा अत्यंत शुभद होती है। पंचमेश से युक्त
धर्मेश की दशा राज्य, सुख, धन का लाभ करती है। उसी प्रकार कर्मेश से युत
पंचमेश की दशा भी शुभद होती है।।८३।।
षष्ठाष्टमव्ययाधीशाः पंचमाधिप संयुताः ।
तेषां दशा च शुभदा प्रोच्यते कालवित्तमैः ।।८४।।
६।८।१२ भाव के स्वामी पंचमेश से युत हों तो उनकी दशा शुभद होती
है।।८४।।
सुखेशो मानभावस्थो मानेशो सुखराशिगः ।
तयोर्दशां शुभां प्राहुर्ज्योतिः शास्त्रविदो जनाः ।।८५।।
सुखेश दशम भाव में हो और कर्मेश चौथे भाव में हो तो दोनों दशा शुभद
होती है।।८५।।
सुतेशमानेशसुखेशधर्मपा एकत्र युक्ता यदियत्रकुत्र ।
तेषां दशा राज्यफलप्रदा वै तैर्युक्तग्रहाणामपिवै वदेत्तथा ।।८६।।
पंचमेश, कर्मेश, सुखेश, धर्मेश एक ही भाव में हो तो इनकी दशा राज्य
देने वाली होती है।।८६।।
वाहन स्थान संयुक्त-मंत्रनाथदशा शुभा ।
सुखराशिस्थकर्मेशदशा राज्यप्रदायिनी ।।८७।।