बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
ग्रहेषु मन्दो वृद्धोऽस्ति आयुर्वृद्धिप्रदायकः ।
नैसर्गिके बहुसमान्ददाति द्विजसत्तम ।।३७।।
सभी ग्रहों में शनि वृद्ध (निर्बल) है, किन्तु निसर्ग आयु साधन करने
में बहुत वर्ष को देता है।।३७।।
अथ ग्रहाणामुच्चनीचमाह-
अजो वृषो मृगः कन्या कुलीरंझषतौलिकाः ।
सूर्यादीनां क्रमादेतास्तुङ्गसंज्ञाः प्रकीर्तिताः ।।३८।।
दिग्गुणाष्टयमा भागा तिथिभूतर्क्षनखासमा ।
स्वोच्चात्सप्तमं नीचं पूर्वोक्तांशैः प्रकीर्तितम् ।।३९।।
मेष, वृष, मकर, कन्या, कर्क, मीन, तुला राशियों में १०, ३, २८,
१५, ५, २७ अंश सूर्यादि ग्रहों के उच्च होते हैं और अपनी उच्च राशि
से सातवीं राशि में उतने ही अंश तक नीच होते हैं।।३८-३९।।
स्पष्टार्थ चक्र
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रहाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मे. १० | वृ. ३ | म. २८ | क. १५ | क. ५ | मी. २७ | तु. २० | उच्चराशयः अंशाः |
| तु. १० | क. ३ | क. २८ | मी. १५ | म. ५ | क. २७ | मे. २० | नीचराशयः अंशाः |
अथ ग्रहाणां मूलत्रिकोणमाह-
विंशतिरंशाः सिंहे कोणमपरे स्वभवनमर्कस्य ।
उच्चं भागत्रितयं वृषमिन्दोः शेषांशास्युस्त्रिकोणकाः ।।४०।।
सूर्य का सिंह राशि में २० अंश तक मूलत्रिकोण है, शेष १० अंश
स्वराशि है। चन्द्रमा का वृष राशि के आरम्भ से ३ अंश तक उच्च
है, इसके बाद के अंश मूलत्रिकोण हैं।।४०।।
द्वादशभागा मेषे त्रिकोणमपरे स्वभं तु भौमस्य ।
उच्चफलं च कन्यायां बुधस्य तिथ्यंशकैः सदा भवेत् ।।४१।।
भौम का मेष राशि में १२ अंश तथा मूलत्रिकोण है, शेष अंश स्वराशि
है। बुध का कन्या राशि में १५ अंश तक उच्च, इसके बाद ५
अंश तक मूलत्रिकोण और शेष अंश स्वराशि है।।४१।।