बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहस्वरूपाध्यायः ३१
फूलवाले वृक्षों का गुरु-बुध, फूल के वृक्षों का शुक्र और नीरस
वृक्षों का शनि कारक है।।२९।।
राहुश्चाण्डालजातिश्च केतुर्जात्यन्तरस्तथा।
शिखिस्वर्भानुमन्दानां वल्मीकस्थानमुच्यते।।३०।।
राहु की चांडाल जाति और केतु वर्णशंकर जाति का है। केतु, राहु
और शनि का वल्मीक (विमौट) स्थान है।।३०।।
चित्रकन्था फणीन्द्रस्य केतोश्छिद्रयुतो द्विज।
सीसं राहोर्नीलमणिः केतोर्ज्ञेयो द्विजोत्तम।।३१।।
अनेक रंग के कपड़ों से कथरी (गुदरी) राहु का और केतु का छेदों
से युक्त वस्त्र है। राहु का शीशा और केतु का नीलमणि धातु है।।३१।।
गुरोः पीताम्बरं विप्र! भृगोः क्षौमं तथैव च।
रक्तक्षौमं भास्करस्य इन्दोः क्षौमं सितं द्विज ! ।।३२।।
गुरु का पीताम्बर, शुक्र का रेशमी वस्त्र, सूर्य का लाल रंग का, चन्द्रमा
का श्वेत रेशमी वस्त्र है।।३२।।
बुधस्य तु कृष्णक्षौमं रक्तवस्त्रं कुजस्य च।
वस्त्रं चित्रं शनेर्विप्र! पट्टवस्त्रं तथैव च।।३३।।
बुध का काले रंग का, भौम का लाल रंग का वस्त्र और शनि का चित्रवर्ण
पट्टवस्त्र है।।३३।।
भृगोर्ऋतुवसन्तश्च कुजभान्वोश्च ग्रीष्मकः।
चन्द्रस्य वर्षा विज्ञेया शरच्चैव तथा विदः।।३४।।
शुक्र की वसन्तऋतु, भौम और रवि की ग्रीष्मऋतु, चन्द्रमा की
वर्षाऋतु, बुध की शरदऋतु है।।३४।।
हेमन्तोऽपि गुरोर्ज्ञेयः शनेस्तु शिशिरो द्विज ! ।
अष्टौ मासाश्च स्वर्भानोः केतोर्मासत्रयं द्विज ! ।।३५।।
गुरु की हेमन्त ऋतु और शनि की शिशिर ऋतु है। राहु का ८ मास
और केतु का ३ मास है।।३५।।
राह्वारपङ्गुचन्द्राश्चं विज्ञेया धातुखेचराः।
मूलग्रहौ सूर्यशुक्रौ अपरा जीवसंज्ञकाः।।३६।।
राहु, भौम और चन्द्रमा धातु के स्वामी, सूर्य-शुक्र मूल के स्वामी
और शेष बुध, गुरु, केतु जीव के स्वामी हैं।।३६।।