बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
तेषां मध्ये त्रिकोणानां विभागे च नवं कथम्।
स्वल्पमध्यचिरायुष्यं द्वादशाद्धाधिकेन च॥१७॥
यहाँ पर त्रिकोण के विभाग में नव का भेद कैसे हो ? यहाँ प्रत्येक त्रिकोण
में अल्प, मध्य, दीर्घायु बारह (१२) वर्ष का भेद होता है॥१७॥
अल्पायुषस्त्रयो भेदास्त्र्यस्थाने पृथक् पृथक् ।
विलग्नेशाष्टमेशादि लग्नस्थेऽपि द्विजोत्तम ॥१८॥
अल्पायु का तीन भेद तीनों स्थानों में होता है। यदि लग्नेश, अष्टमेश
लग्न में हों तो ॥१८॥
द्वादशाब्दं भवेदायुश्चतुर्विंशति पञ्चमे।
नवमे च षट्त्रिंशाब्दमित्येवं न तु संशयः॥१९॥
१२ वर्ष, पाँचवें भाव में हों तो २४ वर्ष और नवें भाव में हों तो
३६ वर्ष की अल्पायु होती है॥१९॥
लग्नेशराशिकोणेषु लग्नरन्ध्राधिपा यदि।
तत्र स्थितेष्टवेदाब्दं षष्ट्यब्दं पञ्चमे स्थिते॥२०॥
लग्नेश की राशि से त्रिकोण में लग्नेश अष्टमेश हों तो तीन भेद होता
हैं। राशि में हो तो ४८ वर्ष, पाँचवें भाव में हों तो ६० वर्ष॥२०॥
नवमस्थे द्विसप्ताब्दं तन्नवकमिदं मतम्।
लग्नेशाश्रितराशीशात्त्रिकोणेषु स्थिते द्विज॥२१॥
और नवें भाव में हों तो ७२ वर्ष की मध्यमायु होती है। लग्नेश जिस
राशि में हों उसके स्वामी से त्रिकोण में लग्नेश, अष्टमेश हों तो
दीर्घायु के तीन भेद होते हैं॥२१॥
लग्नेशादष्टमेशादि त्रिभागं दीर्घमायुषि।
लग्नस्थे चतुरशीतिः पञ्चमे षटनवात्मकः॥२२॥
लग्नेश, अष्टमेश के योग से दीर्घायु में भी तीन भेद होते हैं। लग्न में
हों तो ८४ वर्ष, पाँचवें भाव में हों तो ९६ वर्ष॥२२॥
नवमेऽष्टोत्तरशतं वर्षेष्वायुर्विनिर्णयः।
द्वादशाब्दानुपाते च ह्येतच्छम्भुप्रणोदितम्॥२३॥
नवम भाव में हों तो १०८ वर्ष की दीर्घायु होती है। यही १२ वर्ष के
अनुपात से शंभु ने कहा है॥२३॥